संत कबीर नगर, 04 अगस्त। जनपद में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध (इम्पैनल्ड) निजी अस्पतालों की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने गठित जांच टीम की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले 10 निजी अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत अस्पतालों को हुए दावों (क्लेम) और भुगतान की भी दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की समीक्षा वर्ष 2018 से 2024 के बीच आयुष्मान योजना में इम्पैनल किए गए अस्पतालों के निरीक्षण के आधार पर की गई। जांच टीमों ने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, पंजीकरण, चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, आधारभूत संसाधनों तथा निर्धारित मानकों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में कई अस्पताल गंभीर कमियों के साथ संचालित पाए गए।
इन कमियों पर प्रशासन सख्त
समीक्षा में सामने आया कि कुछ अस्पताल बिना आवश्यक पंजीकरण के संचालित हो रहे थे, कई जगह योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं मिली, जबकि कुछ अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ और निर्धारित चिकित्सा मानकों का अभाव पाया गया। इन खामियों को मरीजों की सुरक्षा और आयुष्मान योजना की विश्वसनीयता के लिए गंभीर माना गया।
जिन 10 अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, उनमें सेहर मेमोरियल हॉस्पिटल (निघुरी बाजार), न्यू केयर हॉस्पिटल (मेंहदावल बाईपास), न्यू मेडविन हॉस्पिटल (गोरखर देहात), मुनमुन क्लीनिक एंड मैटरनिटी हॉस्पिटल, बालाजी हॉस्पिटल (बाईपास खलीलाबाद), जीवन रेखा हॉस्पिटल (बौर-ब्यास), सन्स हॉस्पिटल (टेमा रहमत), एम. गोल्ड हॉस्पिटल, केयर हॉस्पिटल (समय माता मंदिर के पीछे, खलीलाबाद) तथा ओम साई हॉस्पिटल (जिला अस्पताल के निकट) शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया ने बताया कि जनपद में आयुष्मान योजना से 37 अस्पताल इम्पैनल्ड हैं, जिनमें से 4 अस्पतालों को अब तक कोई क्लेम भुगतान नहीं हुआ, जबकि शेष 33 अस्पतालों में कुछ संस्थानों को सर्वाधिक दावे और भुगतान प्राप्त हुए हैं। इनमें रजत हॉस्पिटल, एसआर हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल, नाथनगर, शंभूनाथ मेमोरियल हॉस्पिटल, पटेल हॉस्पिटल और स्पर्श हॉस्पिटल प्रमुख हैं।
जिलाधिकारी ने इन अस्पतालों के क्लेम और भुगतान की अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीम से पुनः जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच हो सके।
इसके अलावा डीएम ने सभी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर के लिए डिफिब्रिलेटर, फायर सेफ्टी व्यवस्था तथा कम से कम दो आपातकालीन निकासी मार्ग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया गया कि जो अस्पताल आयुष्मान योजना के निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें डी-इम्पैनल्ड (सूची से बाहर) किया जाएगा।
समीक्षात्मक विश्लेषण
यह कार्रवाई केवल 10 अस्पतालों तक सीमित प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि जिले की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। यदि बिना पंजीकरण, बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों और बिना प्रशिक्षित स्टाफ के अस्पताल आयुष्मान योजना में वर्षों तक सूचीबद्ध रहे, तो यह निगरानी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर करता है। दूसरी ओर, जिन अस्पतालों को सर्वाधिक क्लेम भुगतान हुआ है, उनकी दोबारा जांच कराने का निर्णय इस बात का संकेत है कि जिला प्रशासन योजना के वित्तीय और चिकित्सीय दोनों पहलुओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल नोटिस और निर्देशों तक सीमित रहेगी, या वास्तव में दोषी अस्पतालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए मरीजों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। जनहित की दृष्टि से इस कार्रवाई के परिणाम और उसके अनुपालन पर आने वाले दिनों में सभी की निगाहें रहेंगी।

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