(By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)
संतकबीरनगर। मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत बखिरा पुलिस ने नाबालिग को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के मामले में वांछित एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को निधुरी तिराहा के पास से गिरफ्तार कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेजा गया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह के पर्यवेक्षण में की गई।
09 सितंबर को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित पक्ष की ओर से 09 सितंबर 2026 को थाना बखिरा में प्रार्थना पत्र देकर नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था। मामले में थाना बखिरा पर मु0अ0सं0 357/2026 दर्ज किया गया।
मुकदमे में बीएनएस की धारा 87, 137(2), 64(2M) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5L/6 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने महिला एवं बाल अपराध की संवेदनशीलता को देखते हुए अभियुक्त की तलाश शुरू की और पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मोहम्मद सैफ उर्फ मुनक्का पुत्र सुभानल्लाह, निवासी खजुरी, थाना बखिरा को निधुरी तिराहा के पास से गिरफ्तार कर लिया।
महिला एवं बाल अपराध में त्वरित कार्रवाई की परीक्षा
पुलिस की ओर से इस मामले में गिरफ्तारी को त्वरित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के साथ-साथ जांच की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। नाबालिग की बरामदगी, उसके बयान, चिकित्सकीय परीक्षण, डिजिटल एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाना मामले की न्यायिक परिणति के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विशेष रूप से पॉक्सो से जुड़े मामलों में पीड़ित नाबालिग की पहचान और गोपनीयता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच में जुटाए जाने वाले साक्ष्य और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त को आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए रवाना किया गया।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम
कार्रवाई करने वाली टीम में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल महेन्द्र शर्मा, हेड कांस्टेबल उमेश यादव, हेड कांस्टेबल राजीव वर्मा तथा कांस्टेबल बलराम शामिल रहे।
नोट: अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; मामले में अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

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