(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। पुलिसिंग की सफलता केवल थाने में दर्ज मुकदमों और कार्रवाई के आंकड़ों से तय नहीं होती, बल्कि किसी गांव, मोहल्ले या बीट क्षेत्र में पुलिसकर्मी स्थानीय परिस्थितियों को कितनी गंभीरता से समझता है, इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए थाना महुली में रिक्रूट आरक्षियों को बीट पुलिसिंग और पुलिस अभिलेखों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देश के क्रम में आयोजित प्रशिक्षण में रिक्रूट आरक्षियों को बीटवार रजिस्टर के विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी गई। खास बात यह रही कि प्रशिक्षण को केवल मौखिक जानकारी तक सीमित रखने के बजाय आरक्षियों से आवश्यक प्रविष्टियां स्वयं भरवाई गईं, ताकि वे अभिलेखों की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझ सकें।
प्रशिक्षण के दौरान बीट कांस्टेबल की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस और आमजन के बीच बीट पुलिसकर्मी को महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उन्हें अपने क्षेत्र के गांवों, मोहल्लों, प्रमुख व्यक्तियों, विवादों, संवेदनशील स्थानों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी रखने के लिए प्रेरित किया गया।
छोटी सूचना पर नजर, बड़ी घटना को रोकने की चुनौती
बीट पुलिसिंग का मूल उद्देश्य केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं को समय रहते समझना और संभावित विवाद या अपराध की स्थिति को पहले ही पहचानना है। ऐसे में रिक्रूट आरक्षियों को दिया जा रहा यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता की कसौटी प्रशिक्षण कक्ष में नहीं, बल्कि बीट क्षेत्र में होगी। सवाल यही है कि रजिस्टर में दर्ज सूचनाएं कितनी नियमित रूप से अपडेट होती हैं और बीट पुलिसकर्मी उन सूचनाओं के आधार पर कितनी सक्रियता से स्थानीय स्तर पर संवाद और निगरानी कायम रखते हैं।
डीआईजी के 26 बिंदुओं पर भी जोर
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस उपमहानिरीक्षक, बस्ती परिक्षेत्र द्वारा बताए गए 26 महत्वपूर्ण बिंदुओं से भी रिक्रूट आरक्षियों को अवगत कराया गया। प्रत्येक बिंदु के महत्व को समझाते हुए उनके गंभीरता और शत-प्रतिशत अनुपालन के निर्देश दिए गए।
पुलिस प्रशिक्षण में ऐसे निर्धारित बिंदुओं को शामिल करने का उद्देश्य बीट स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। लेकिन निर्देशों की सफलता अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका पालन कितनी नियमितता और गंभीरता से किया जाता है।
वर्दी के साथ जिम्मेदारी भी समझाई
रिक्रूट आरक्षियों को यह संदेश भी दिया गया कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, संवेदनशीलता और जनसेवा की जिम्मेदारी भी है। आमजन से व्यवहार, शिकायतकर्ता की सहायता और जरूरत के समय तत्काल प्रतिक्रिया जैसे पहलू पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं।
प्रशिक्षण का उद्देश्य रिक्रूट आरक्षियों को शुरुआती स्तर से ही जिम्मेदार, अनुशासित, संवेदनशील और व्यावहारिक रूप से दक्ष पुलिसकर्मी बनाना बताया गया है। निश्चित रूप से प्रभावी प्रशिक्षण पुलिसिंग की मजबूत नींव तैयार कर सकता है, लेकिन उस प्रशिक्षण की असली सफलता तब मानी जाएगी जब उसका असर बीट क्षेत्र में बेहतर जनसंवाद, समय पर सूचना संकलन, विवादों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के रूप में दिखाई दे।

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