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स्वास्थ्यसंतकबीरनगर

क्षय रोगियों की पहचान में अहम भूमिका निभा रहे हैं निजी चिकित्‍सक, 1127 क्षय रोगियों को चिन्हित करने के साथ 874 क्षय रोगियों को स्‍वस्‍थ भी बनाया है:-सीएमओ

क्षय की पहचान में अहम भूमिका निभा रहे हैं निजी चिकित्‍सकों – बीजकों को जांच के लिए भेज रहे हैं
सरकार अस्‍पताल
– पिछले तीन वर्षों में 1127 क्षय पीड़ित जुड़े , 874 हुए स्व‍स
संतकबीरनगर, 6 जनवरी 2023 ।
जनपद को क्षयमुक्‍त बनाने के लिए जरूरी है कि लक्षण नजर आने पर जितनी जल्‍दी संभव हो जांच करें और टीबी की पुष्टि हो तो तत्‍काल उपचार जुड़ें। ऐसा न करने से एक टीबी मरीज साल भर में अनजाने में 15 लोगों को टीबी का मरीज बना सकता है। स्वास्थ विभाग से कंधे से कंधा मिलाकर अब निजी चिकित्‍सकों की भी जांच और इलाज में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में प्राइवेट चिकित्‍सकों ने जिले में 1127 क्षोभ को पंजीकृत करने के साथ 874 क्षत को स्‍वस्‍थ भी बनाया है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा का कहना है कि जब तक कोई क्षय रोगी इलाज की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो जाता है तब तक वह समाज में संक्रमण फैलाने की भूमिका में रहता है। चिन्हित क्षय रोगी की अपेक्षा पहचान से बाहर के क्षय रोगी  ज्‍यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। पीपीएम समन्‍वयक ( प्राइवेट पब्लिक मिक्‍स कोआर्डिनेटर ) के माध्‍यम से जिले के सभी चिकित्‍सकों का डाटा तैयार किया जा रहा है। उनसे सम्‍पर्क करके संभावित क्षय रोगी को जिला क्षय रोग कार्यालय भेजने को प्रेरित किया जाता है। राष्‍ट्रीय क्षय रोग उन्‍मूलन कार्यक्रम  की पब्लिक प्राइवेट मिक्‍स कोआर्डिनेटर कविता पाठक बताती हैं कि अभी तक जिले के कुल आठ चिकित्‍सकों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है। इनके माध्‍यम से क्षय रोगियों की पहचान करके उन्‍हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है तथा उनको क्षयमुक्‍त करने के साथ ही क्षय रोग के प्रसार को रोका जा रहा है। जिले के अन्‍य चिकित्‍सकों से भी सम्‍पर्क किया जा रहा है, ताकि क्षय रोग के प्रसार को रोका जा सके। एक क्षय रोगी किरन ( बदला हुआ नाम ) बताती हैं कि वह डॉ अशरफ अली के क्‍लीनिक पर इलाज के लिए गयीं। वहां पर क्षय रोग की पुष्टि हुई तो डॉ अशरफ लेकर जिला क्षय रोग कार्यालय गए। वहां पर पंजीकरण कराया। अब उनको नियमित रुप से हर महीने 500 रुपए पोषण भत्‍ता के रुप में मिलता है तथा दवाएं भी मिलती हैं। चार माह इलाज के बीत गए हैं। पहली रिपोर्ट सामान्‍य आई है। चिकित्‍सक ने बताया कि शीघ्र ही वह क्षयमुक्‍त हो जाएंगी। वह नियमित रुप से मास्‍क का प्रयोग भी करती हैं तथा उनके परिवार के लोगों की भी जांच हुई तथा उनको दवाएं दी गयी हैं, ताकि उनको क्षय रोग से मुक्‍त बनाया जा सके।

क्षय उन्‍मूलन को जनान्‍दोलन बनाएं प्राइवेट चिकित्‍सक – सीएमओ

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मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी डॉ अनिरुद्ध कुमार सिंह ने जिले के सभी चिकित्‍सकों से अपील की है कि अगर उनके पास ऐसा कोई मरीज आए जिसके अन्‍दर क्षय रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हों तो इसकी सूचना जिला क्षय रोग कार्यालय को अवश्‍य दें। इससे रोगी एक सिस्‍टम में आ जाएगा तथा वह रोग का वाहक नहीं बनेगा। क्षय उन्मूलन को जनांदोलन बनाने के लिए जरूरी है कि हर कोई अपनी सहभागिता दिखाए, इसी के तहत प्राइवेट चिकित्सक भी अपनी भूमिका निभाएं और शत-प्रतिशत टीबी मरीजों को नोटिफाई कराएँ ताकि उन्हें सरकारी सुविधाएँ मिल सकें और वह जल्दी से जल्दी स्वस्थ बन सकें ।

प्राइवेट चिकित्‍सकों को मिलते हैं 1000 रुपए

रोग क्षय के जिला कार्यक्रम समवन्यक अमित आन्नीद बयान हैं कि जो भी निजी चिकित्‍सज़ोन क्षय रोगी के बारे में सूचित करता है और जांच में क्षय रोग की पुष्टि है तो उसे 500 रुपए मिलते हैं। इलाज के बाद जब वह स्वास्थ हो जाता है तो 500 रुपए और दिए जाते हैं। इस प्रकार एक क्षय रोगी के चिन्‍हरण और स्‍वस्‍थ होने पर निजी चिकित्‍सक को कुल 1000 रुपए दिए जाते हैं।

निरन्‍तर किया जा रहा है क्षयग्रस्त का चिन्‍हीकरण
कल्पित हास्पिटल की डॉ सोनी सिंह कहते हैं कि मेरी चिकित्‍सालय पर जो भी सनी क्षय रोगी आते हैं उनका क्षय रोग अस्‍पताल भेजकर उनकी सीबीआईनाट जांच कराई जाती है। अगर उसका अन्‍दर क्षय रोग की पुष्टि होती है, तो हम उसे जिला क्षय रोग अस्‍पताल से जोड़कर इलाज का आकलन करते हैं। इस वर्ष अभी तक 35 क्षयग्रस्त आश्रित का भुगतान किया गया है।

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