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संतकबीरनगर

संपत्ति पंजीकरण के नाम पर जनता का खून चूस रही है यूपी सरकार! अधिकतम 20 हजार की जगह भारी भरकम देनी पड़ रही है प्रोसेसिंग फीस, ब्लड रिलेशन में रजिस्ट्री पर भी लगने लगा जनरल शुल्क

संतकबीरनगर । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने संपत्ति अपनों के नाम करने वालों को बड़ा तोहफा दिया था, प्रदेश में ब्लड रिलेशन में होने वाली रजिस्ट्री मात्र 5 हजार के स्टाम्प पर होती थी, और एक प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस लग रही थी. योगी सरकार ने कैबिनेट से इस प्रस्ताव को पास कर दिया था, सरकार ने इस कैटेगरी के मुताबिक परिवार के अंदर माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्र वधू, पुत्री-दामाद, सगा भाई-सगी बहन, पुत्र-पुत्री का बेटा-बेटी आते हैं, जिसे अब सरकार ने पूर्ण रूप से बंद कर दिया है । जिससे सामाजिक अपराध और परिवार में वैमनस्यता,और न्यायालयों में मुकदमो की संख्या बढ़ने की संभावना बलवती हो रही है ।

इस योजना के लागू होने से पहले परिवार के अंदर गिफ्ट डीड में भी डीएम सर्किल रेट के हिसाब से रुपए खर्च करने पड़ते थे, जिसमें अगर कोई 50 लाख की संपत्ति है तो उसके लिए कम से कम 4 लाख 20 हजार खर्च करने पड़ते थे, लेकिन योजना शुरू होने से मात्र 5000 रुपए और प्रोसेसिंग फीस देनी होती थी ।

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आपको बतादें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 18 जुलाई 2022 को छूट की योजना लागू की थी, जिसमे संपत्ति अपनों के नाम करने वालों को बड़ा तोहफा दिया था.जो ब्लड रिलेशन में होने वाली रजिस्ट्री पर भारी भरकम स्टांप शुल्क नहीं देने का प्राविधान लागू किया गया था, मात्र 5 हजार के स्टाम्प और एक प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस पर रजिस्ट्री होती थी, यूपी के हजारों लोगों ने इसका लाभ उठाया था, लेकिन इसे 6 महीने के बाद बन्द कर दिया गया, जिससे हजारों लोग इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए ।

विदित हो कि योगी सरकार ने दिनाँक 18 जुलाई 2022 से 6 महीने के लिए तोहफा दिया था, इस कैटेगरी के मुताबिक परिवार के अंदर माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्र वधू, पुत्री-दामाद, सगा भाई-सगी बहन, पुत्र-पुत्री का बेटा-बेटी को गिफ्ट करने की सुविधा थी, लेकिन अब ये सुविधा बन्द होने से हजारों लोग वंचित हैं जहां विवाद बढ़ने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं,
क्योंकि छूट खत्म होने से गरीब परिवार भारी भरकम रजिस्ट्री शुल्क देने में पूरी तरह से असमर्थ है,और अब डीएम सर्किल रेट के हिसाब से रुपए खर्च करने पड़ेंगे, जिसमें अगर कोई 50 लाख की संपत्ति है तो उसके लिए कम से कम 4 लाख 20 हजार खर्च करने पड़ेंगे ।
आपको बतादें कि सरकार ने राजस्व में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने का रोना-रो कर इसे बंद कर दिया जो सामाजिक दृष्टि से सही नहीं है,क्योंकि 5000 रुपये स्टाम्प शुल्क के बाद भी सरकार ने एक प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस भी लिया था,जो कम नही था, हालांकि पहले एक प्रतिशत नही बल्कि 1000 रुपये प्रोसेसिंग फीस लेने का एलान किया गया था, लेकिन जब लोग रजिस्ट्री कराने पहुँचने लगे तो,सरकार ने इससे पल्ला झाड़ लिया था,और एक प्रतिशत के हिसाब से ही करोड़ो रूपये छूट के नाम पर इकट्ठा कर लिए ।

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छूट बंद किये जाने से कितनी बढ़ेंगी परेशानियां

1-स्टाम्प शुक्ल में छूट बंद होने से परिवारों में विवाद बढ़ने की संभावनाएं बढ़ रही हैं

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2-न्यायालयों में मुकदमो की संख्या बढ़ेगी,और गरीब     परिवार परेशान और हलकान होगा

3-सामाजिक अपराध बढ़ने की भी संभावनाएं हैं,

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4- परिवारों में वैमनस्यता बढ़ने की संभावनाएं

देखा जाय तो अगर दान भिलेख में छूट की योजना हमेंशा के लिए सरकार पुनः शुरू कर दे तो ये सारी संभावनाएं शून्य हो जाएगी,और सरकार को भी ज्यादा राजस्व आना शुरू हो जाएगा,क्योकि एक रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क के अलावा एक प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस भी मिलनी है,जो कम नहीं है।
क्योंकि मान लीजिए किसी जमीन की मालियत 20 लाख रुपये है तो उसपर भी एक प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस और 5000 रुपये स्टाम्प शुल्क यानी कुल 25 हजार रुपये सरकार को प्राप्त होगा जो कम नहीं है ।

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विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले जनरल रजिस्ट्री के लिए स्टॉम्प शुल्क के अलावा प्रोसेसिंग फीस के रूप में अधिकतम 20 हजार रुपये ही लेने का प्राविधान था, लेकिन कोरोना काल से अधिकारियों ने विभाग के प्रमुख सचिव को गुमराह करके इसे एक प्रतिशत करवा दिया,जो सरासर जनता के लिए अन्याय है,

जब सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा दे रही है तो यूपी की आम जनता के साथ ऐसा अन्याय क्यों । सरकार को चाहिए ब्लड रिलेशन (दान विलेख) में भूमि रजिस्ट्री में छूट को पुनः लागू करे । जिससे सामाजिक अपराध, न्यायालयों में बढ़ती भीड़,और पारिवारिक झगड़ों में कमी आ सके, साथ ही जनरल रजिस्ट्री की प्रोसेसिंग फीस के रूप एक प्रतिशत अधिकतम 20,000 रुपये लागू करके “सबका साथ सबका विकास” नारे को चरितार्थ करे ।

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