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कोल इंडिया के चेयरमैन को ज्ञापन सौंप भू-विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण करने की किसान सभा ने की मांग, 11 को कुसमुंडा और 17 को गेवरा खदान-कार्यालय बंद का आह्वान

गेवरा (कोरबा)। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आज कोल इंडिया के नए चेयरमैन पीएम प्रसाद को ज्ञापन सौंपकर भू-विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। किसान सभा ने 11 अगस्त को को कुसमुंडा और 17 अगस्त को गेवरा खदान-कार्यालय बंद करने के अपने आह्वान को पुनः दुहराया है।

उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले में एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा, गेवरा और दीपका में रोजगार, बसावट तथा जमीन वापसी सहित मूलभूत सुविधाओं को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ मिलकर लगातार दो वर्षों से आंदोलनरत है। कोयला उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से चेयरमैन प्रसाद का इस प्रोजेक्ट में यह पहला दौरा था, जिसे एसईसीएल प्रबंधन ने सार्वजनिक नहीं किया था। लेकिन उनके दौरे की भनक लगते ही किसान सभा के नेतृत्व में गेवरा हाउस के सामने बड़ी संख्या में भू विस्थापित इकठ्ठा होकर दौरे का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि कोयला उत्पादन बढ़ाने से पहले एसईसीएल प्रबंधन भू-विस्थापितों के समस्याओं का पहले निराकरण करें। भू-विस्थापितों बड़ी संख्या को देखते हुए सीआईएसएफ के जवानों ने गेस्ट हाउस के मुख्य द्वार को बंद कर दिया था।

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भू विस्थापितों के विरोध प्रदर्शन और कई बार खदान और कार्यालय के घेराव की जानकारी होते ही कोल इंडिया चेयरमैन पीएम प्रसाद और एसईसीएल के सीएमडी प्रेमसागर मिश्रा ने किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल को गेवरा हाउस में चर्चा के लिए बुलाया। किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में दीपक साहू, रेशम यादव, दामोदर श्याम, रघु यादव, जय कौशिक, सुमेन्द्र सिंह ठकराल, होरी, शिवदयाल कंवर, बसंत चौहान आदि शामिल थे। चेयरमैन प्रसाद ने गंभीरता से भू विस्थापितों की समस्याओं को सुना और जल्द निराकरण का आश्वासन दिया।

किसान सभा ने अपने ज्ञापन में इस तथ्य को रेखांकित किया है कि जिन किसानों ने 1978-2004 के बीच अपनी जमीन देकर देश-दुनिया को रोशन करने का काम किया है और कोरबा जिले को ऊर्जाधानी के रूप में पहचान दिलाई है, आज वही परिवार रोजगार के लिए भटक रहे हैं। किसान सभा ने मांग की है कि हर खाते पर सभी प्रभावितों को रोजगार देने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए तथा खदान बंद हो जाने अथवा अनुपयोगी होने पर पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस किया जाये। अपने ज्ञापन में किसान सभा ने पुनर्वास ग्रामों में बुनियादी सुविधाएं देने और भूविस्थापितों के बच्चो को निशुल्क शिक्षा और उनके परिवारों को एसईसीएल के अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान किये जाने की भी मांग की है।

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किसान सभा के सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि भू-विस्थापितों के सामने संघर्ष के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है और वे इन मांगों पर 11 अगस्त को कुसमुंडा और 17 अगस्त को गेवरा में खदान बंद और कार्यालयों का घेराव करने के अपने आह्वान पर डटे हुए हैं।

*प्रशांत झा*
सचिव, छग किसान सभा, कोरबा
——————————-
*Chhattisgarh Kisan Sabha (CGKS)*
*(Affiliated to All India Kisan Sabha – AIKS)*
*District Committee Korba, Chhattisgarh*

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*Press Release : 05.08.2023*

*Kisan Sabha submitted a memorandum to the chairman of Coal India demanding redressal of the problems of the displaced people, called for Kusmunda mine-office shutdown on 11th and Gevra on 17th*

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Gevra (Korba). The Chhattisgarh Kisan Sabha today submitted a memorandum to the new chairman of Coal India, PM Prasad, demanding redressal of the problems of the land displaced farmers. The Kisan Sabha reiterated its call for closure of the Kusmunda mine-office on August 11 and the Gevra mine-office on August 17.

It is worth mentioning that the Chhattisgarh Kisan Sabha and the Bhoo-visthapit Rojgar Ekta Sangh have been agitating for two consecutive years for providing basic facilities including employment, settlement and return of land in SECL’s mega projects Kusmunda, Gevra and Deepka. This was Chairman Prasad’s first visit to the project with the aim of increasing coal production, which was not made public by the SECL management. But as soon as the news of his visit came, under the leadership of Kisan Sabha, a large number of land displaced persons gathered in front of Gevra House and started protesting against the visit. They said that before increasing the coal production, the SECL management should first solve the problems of the land displaced people. In view of the large number of displaced persons, the CISF personnel had closed the main gate of the guest house.

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Coal India Chairman PM Prasad and SECL CMD Premsagar Mishra called the delegation of Kisan Sabha for discussion at Gevra House as soon as they came to know about the protest of land displaced people and siege of mine and office several times. The delegation led by District Secretary of Kisan Sabha Prashant Jha included Deepak Sahu, Resham Yadav, Damodar Shyam, Raghu Yadav, Jai Kaushik, Sumendra Singh Thakral, Hori, Shivdayal Kanwar, Basant Chauhan etc. Chairman Prasad seriously listened to the problems of the land oustees and assured them of early redressal.

In its memorandum, the Kisan Sabha has underlined the fact that the farmers who have worked to illuminate the country and the world by giving their land between 1978-2004 and have recognized Korba district as a powerhouse, today the same families are wandering for employment. The Kisan Sabha has demanded that the process of providing employment to all the affected people on every account should be completed soon and the old acquired land should be returned to the original account holders after the mine is closed or becomes unusable. In its memorandum, Kisan Sabha has also demanded to provide basic facilities in resettlement villages and free education to the children of land displaced and free treatment to their families in SECL hospitals.

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Kisan Sabha Secretary Prashant Jha has said that the land displaced have no other option but to struggle and they are standing firm for following their call of closure of mines and gherao of offices on August 11 in Kusmunda and August 17 in Gevra.

*Prashant Jha*
Secretary, Chhattisgarh Kisan Sabha, Korba

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