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अयोध्या मामला-जानिए नक्शा सबूत सहित सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद के पक्षकारों ने क्या कहा,

अयोध्‍या

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या मामले में बुधवार को आखिरी सुनवाई के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत 5 जजों की संविधान पीठ के सामने मुस्लिम पक्षकार के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने गुस्‍से में आकर अयोध्या से संबंधित एक नक्शा ही फाड़ दिया। हिंदू पक्षकार के वकील विकास सिंह ने एक किताब का उल्‍लेख करते हुए यह नक्शा दिखाया था। इस नक्‍शे को बनाने वाले पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने दावा किया है कि यह नक्‍शा राम के जन्‍मस्‍थान का निर्णायक सबूत है।

कुणाल ने कहा कि उन्‍हें इस बात का कोई आश्‍चर्य नहीं है कि धवन ने उनके नक्‍शे को फाड़ दिया। किशोर ने कहा, ‘एक वकील के रूप में राजीव धवन जानते हैं कि यदि यह नक्‍शा को कोर्ट को सौंपा गया तो वह केस हार जाएंगे। वर्ष 1989-1990 में गृह मंत्रालय में ओएसडी रहने वाले किशोर कुणाल ने वीपी सिंह और चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री रहने के दौरान अयोध्‍या के मुद्दे पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच बातचीत शुरू कराई थी और उसमें समन्‍वयक की भूमिका निभाई थी।

‘यह नक्‍शा जन्‍मस्‍थान का निर्णायक सबूत’
कुणाल ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2016 में उनकी किताब में प्रकाशित यह नक्‍शा इस बात का ‘निर्णायक सबूत’ है कि भगवान राम का जन्‍म किस स्‍थान पर हुआ था। उन्‍होंने कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले यह दलील दे रहे हैं कि राम के जन्‍मस्‍थान का ह‍िंदुओं का दावा ‘विश्‍वास या कल्‍पना’ पर आधारित है, ऐसे में उनका यह नक्‍शा यह बताता है कि ठीक-ठीक किस स्‍थान पर राम का जन्‍म हुआ था।

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नक्‍शा द‍िखाते कुणाल क‍िशोर

उन्‍होंने कहा कि आर्किटेक्ट की मदद से इस नक्‍शे को तैयार करने में 5 साक्ष्‍यों का इस्‍तेमाल किया गया है और यह नाप में भी फिट है। किशोर कुणाल ने कहा कि वर्ष 1858 में बाबरी मस्जिद के मुइज्जिन सैयद मोहम्‍मद खतीब की ओर से पहली बार पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई थी। उस समय पंजाब के 25 सिखों के दल ने मस्जिद पर कब्‍जा करने का प्रयास किया था। किशोर ने बताया कि पुलिस शिकायत के अंदर कहा गया है कि ‘मस्जिद के बीच में जन्‍मस्‍थान का निशान है, जिसकी सदियों से हिंदू पूजा करते आ रहे हैं।’

‘विष्‍णु ने राम का अवतार लिया था’
कुणाल ने कहा कि इस नक्‍शे को बनाने में ऑस्ट्रिया के पादरी जोसेफ टाइफेन्‍थलर के विवरण की भी मदद ली गई है। जोसेफ सन 1760 में अवध क्षेत्र की यात्रा पर आया था। जोसेफ ने ‘कोटि और कसौटी’ पिलर के बारे में बारे में बताया है जो मस्जिद के आंतरिक पथ को सपॉर्ट देने के लिए बनाए गए 12 पिलर में शामिल थे। जोसेफ ने लिखा है कि प्रवेश द्वार पर बने इन पिलर को हिंदू ‘बेदी’ कहते थे क्‍योंकि यहीं पर ‘विष्‍णु ने राम का अवतार’ लिया था। पादरी ने चबूतरे के वास्‍तविक आकार के बारे में भी बताया है। किशोर ने कहा, ‘इस चबूतरे की सीमा पर चूना लगाया था। यह लंबाई में 18 फुट और 9 इंच लंबा और 15 फुट 5 इंच ऊंचा था।’

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 पेश किया गया जन्‍मभूम‍ि का नक्शा

पूर्व आईपीएस अधिकारी कुणाली ने ऑस्ट्रिया के पादरी के हवाले से यह भी दावा किया कि राम मंदिर को न तो बाबर ने और न ही उसके सेनापति मीर बाकी ने तोड़ा था, बल्कि औरंगजेब ने 1660 में इस मंदिर को तोड़ा था। जोसेफ ने कहा कि हालांकि औरंगजेब ने हिंदुओं के आस्‍था के केंद्र जन्‍मस्‍थान को भले ही तोड़ दिया हो, हिंदू फिर भी वहां आते थे और परिक्रमा के करने के बाद अपना शीश झुकाते थे ।

‘जन्‍म‍ स्‍थान सीता रसोई के पास था’
कुणाल ने कहा कि इस नक्‍शे को बनाने में चौथा स्रोत 1870 के दशक में फैजाबाद के तत्‍कालीन सहायक आयुक्‍त पी कार्नेजी का विवरण है जिसमें कहा गया है कि ‘जन्‍म‍ स्‍थान सीता रसोई के पास’ था और पांचवां स्रोत फ्रांसिस बुचानन का वर्ष 1813-14 में इस इलाके का किया गया सर्वे था। इस दौरान किशोर कुणाल इतिहासकार डीएन झा के उस दावे को खारिज करते हैं जिसमें उन्‍होंने कहा था कि वह और उनके साथी तीन इतिहासकार स्‍वतंत्र इतिहासकार के रूप में अयोध्‍या गए थे और एक रिपोर्ट तैयार की थी

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जन्‍मस्‍थान का नक्‍शा

पूर्व आईपीएस ने कहा कि झा, आरएस शर्मा, सूरज भान और अथर अली चारों इतिहासकार अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद ऐक्‍शन कमिटी की ओर से नियुक्‍त किए गए थे। विशेष कार्याधिकारी होने के नाते मैंने दोनों पक्षों से कहा था कि 10 विशेषज्ञों का नाम दें जो बातचीत के दौरान अपने सबूत रख सकें और अपनी बात कह सकें। बता दें कि इस साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इतिहासकारों की रिपोर्ट को महत्‍व नहीं दिया था और कहा कि यह ‘केवल राय’ है। किशोर ने इस रिपोर्ट को ‘एक तरफा’ करार दिया। उन्‍होंने कहा कि ‘इन इतिहासकारों ने केवल हिंदुओं के दस्‍तावेजों में कमी तलाश की और बाबरी मस्जिद कमिटी के दावों पर कुछ नहीं कहा।

 

नक्‍शे को फाड़ने पर राजीव धवन ने सफाई दी

कुणाल ने कहा, ‘जन्‍मभूमि पर ऐसे कई दस्‍तावेज हैं जिन पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। जिन दस्‍तावेजों की मैं बात कर रहा हूं वे ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखे इंडिया ऑफिस रेकॉर्ड, बड़ौदा ओरियंटल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट और बनारस लाइब्रेरी का हिस्‍सा हैं।’ बता दें कि नक्‍शे को फाड़ने पर राजीव धवन ने सफाई दी थी। उन्‍होंने कहा कि उन्होंने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की मर्जी से वह नक्शा फाड़ा था। इस पर चीफ जस्टिस ने भी सहमति जताई थी।
साभार एन बी टी

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