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फर्जी लोन कराकर आधा दर्जन बैंको से, 100 करोड़ का चूना लगाने वाले तीन ठग गिरफ्तार

रिपोर्ट रामा नन्द तिवारी

दिल्ली ।
आप स्कूलों में अपने बच्चों के दाखिले के लिए अपनी आईडी और फोटो लगा रहे हैं, तो जरा सावधान हो जाइये। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो स्कूलों से उन बच्चों के फार्म रद्दी में खरीदकर आईडी से फर्जी लोन करा कर हैं, बैंको करोड़ का चूना लगा रहा था। इतना ही नहीं फर्जी कंपनी बनाकर, उसमें कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर और फिर उनके नाम पर फर्जी लोन लेकर दर्जन भर बैंकों को लगभग 100 करोड़ का चूना लगाने वाले तीन शातिर साइबर ठगों को नोएडा के साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक, आईसीआईसी बैंक के 127 क्रेडिट और डेबिट कार्ड, 86 पैन कार्ड, 23 मोबाइल फोन, बैंकों और कंपनियों के 10 फर्जी मोहर, कई बैंकों के 127 चेक बुक, विभिन्न बैंकों के 14 पासबुक, कार, 27 सिम कार्ड और दो वोटर आईडी बरामद हुआ है।
नोएडा नवीनतम समाचार है कि
साइबर क्राइम थाने की पुलिस की गिरफ्त में अरिंदम मैती उर्फ आशीष सिंह, रवि कुमार उर्फ हरीश चंद्र और मोहम्मद शारिक को इलेक्ट्रानिक सविलांस और इनपुट के आधार पर सेक्टर-142 स्थित एडवेंट टावर बिजनेस पार्क के सातवें फ्लोर पर छापा मारकर गिरफ्तार किया गया। डिप्टी एसपी विवेक रंजन राय ने बताया कि पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि वे पहले एक्सिस बैंक की सब्सिडियरी कंपनी में लोगों को लोन दिलाने का काम करते थे। उस दौरान उन्हें इस प्रक्रिया की खामियों का पता चला। उसके बाद इन लोगों ने फरीदाबाद स्थित अनाज मंडी में एफआईएस ग्लोबल नाम की कंपनी खोली। चूंकि पहले से ये लोन दिलाने का काम करते रहे थे, इसलिए इन्हें उनके परिचय से दूसरे लोगों से मुलाकात होने लगी, जो लोन चाहते थे। उनके दस्तावेज लेकर अभियुक्त उन्हें अपनी कंपनी का कर्मचारी दिखा देते थे और उनकी सेलरी एकाउन्ट खुलवा देते थे। उसके बाद कंपनी का कर्मचारी होने के नाते उन्हें आसानी से लोन मिल जाता था। इस तरह एक्सिस बैंक से 21 लोगों के नाम पर एक करोड़ 36 लाख रुपये का लोन करा लिया। लोन की अदायगी न करनी पड़े, इसलिए फरीदाबाद का आफिस बंद कर दिया।

फरीदाबाद के बाद इन लोगों ने नोएडा के नवीनतम समाचार है कि उन्होंने सेक्टर-142 के एडवेंट टॉवर में विजडम डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी खोली। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन लोन के लिए आए राजेश और सुब्रमण्यिम नाम के व्यक्तियों की मूल आईडी का इस्तेमाल किया। पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के लिए जमा किए जाने वाले फार्म के साथ उनके परिजनों की आईडी भी जमा की जाती है। एडमिशन न होने पर उन फार्मों को आईडी के साथ कबाड़ियों को रद्दी के भाव बेच दिया जाता है। उसे ये लोग खरीद लेते थे और उसमें लगी फोटो को गूगल में सर्च कर उससे मिलती-जुलती फोटो छांटकर निकाल लेते थे। उसके बाद उससे फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक एकाउन्ट खुलवाकर उन खातों पर लोन ले लेते थे। उन फर्जी नाम-पते वाले व्यक्तियों का एक पता अपनी कंपनी का देते थे।

साइबर सेल के डिप्टी एसपी विवेक रंजन राय ने बताया कि बीते दिनों साइबर क्राइम थाने में एक्सिस बैंक की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने विंडसम डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड, एक्सेलोन टेक लिमिटेड और एजीसीओ टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम की फर्जी कंपनियां बना रखी हैं। उनमें काम करने वालों के सेलरी खाते खुलवा कर बैंकों से पर्सनल और वाहन लोन लेकर करोड़ों का फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि इस कंपनी के लोगों ने लोन लेने वालों को विप्रो, डेल इंटरनेशनल, एफआईएस ग्लोबल और सिस्टम ऑटो कंपोनेंट जैसी प्रसिद्ध कंपनियों का कर्मचारी बताया जाता था। अब तक की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि एक्सिस बैंक से लगभग 09 करोड़, एचडीएफसी बैंक से लगभग 10 करोड़, बंधन बैंक, कोटेक महिन्द्रा बैंक से भी लगभग 10 से 12 करोड़ का लोन ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभी इनके बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई जा रही है। डबिड कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेजों के सत्यापन के साथ ही पूरे मामले में बैंकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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