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मोटी कमाई का लालच देकर,करोडों रुपये लेकर जालसाज हुआ फरार,पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी

 

गोरखपुर। व्यापार में चंद समय में मोटी कमाई कर ऊंची उड़ान भरने के लालच में कइयों ने अपनी जमा-पूंजी भी गंवा दी है। लोगों को व्यापार में ज्यादा मुनाफा दिलवाने का झांसा देकर एक शख्स ने दस महीने में करोड़ों रुपये वसूले और फिर किराए के मकान को छोड़कर फरार हो गया। पीड़ितों को आरोपी के नाम के अलावा सिर्फ चंद मोबाइल नंबर ही पता हैं, जिसका जालसाज इस्तेमाल किया करता था। एसएसपी से मंगलवार को 12 लोगों ने सामूहिक रूप से धोखाधड़ी की शिकायत की थी, जिसके बाद शाहपुर पुलिस ने आरोपी अनुराग चतुर्वेदी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसको असली के रूप में प्रस्तुत करने की धाराओं में बुधवार को केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार थाने में दर्ज केस के मुताबिक पीड़ितों से अनुराग ने यूनिक इंडस्ट्रीज आर्गेनिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में संपर्क किया था। उसने व्यापारियों को टॉयलेट क्लीनर, रूम फ्रेशनर आदि कई प्रोडेक्ट बेचने पर ज्यादा फायदा देने का झांसा दिया। शुरुआती दौर में सामान भी भेजा। फिर डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा देकर लोगों से रुपये लगवाने लगा। यहां तक सब कुछ ठीक चला, फिर इसके बाद उसने ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जो व्यापार की शुरुआत करने की कोशिश में थे। संपर्क में आए लोगों से कहा कि यदि बिल नहीं लिया जाएगा तो जीएसटी नहीं देना होगा और बीस प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ भी होगा। फायदे के लालच में व्यापारी इस बात पर रजामंद हो गए। सभी को झांसा देकर उसने करोड़ों रुपये ऐंठ लिए, फिर धीरे धीरे लोगों को रुपये देने में आनाकानी करने लगा। कुछ लोगों को चेक दिया जो बाउंस हो गया। अचानक उसके गायब होने के बाद लोगों ने मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, सभी नंबर स्विच ऑफ मिले। उसके घर पर गए तो पता चला कि शाहपुर के हरीश नाम के जिस शख्स को वह अपना बताता था वह किराए पर था। रुपये गंवाने के बाद लोगों ने केस दर्ज कराया है।

ब्लैक मनी लगाने वालों की संख्या भी कई
जालसाज के झांसे में फंसे लोगों का दावा है कि शहर के कई बड़े व्यापारियों ने ब्लैक मनी भी लगायी है। इस वजह से वह सामने भी नहीं आ रहे हैं। फिलहाल पुलिस के सामने वही लोग आए जिनके पास जालसाज को दी गई रकम का दस्तावेज मौजूद है।
……
जीएसटी बचाने की लालच में फंसते चले गए
दिसंबर 2018 में अनुराग ने व्यापारियों से संपर्क किया था। फिर झांसा देकर व्यापार कराने लगा। जीएसटी बचाने का लालच देकर उसने बिल देना भी बंद कर दिया ताकि व्यापारियों के पास इसका कोई प्रमाण ही ना रहे कि सामान की खरीदारी भी की गई है।
इनके साथ हुई है इतने की ठगी

शक्तिनगर निवासी अमित कुमार द्विवेदी से 1.5 करोड़
मेडिकल कॉलेज मुगलहा निवासी विनोद कुमार पटेल से 51 लाख
देवरिया बाईपास सूबा बाजार निवासी पवन वर्मा से 1 करोड़ 2 लाख
सूरजकुंड निवासी सर्वजीत श्रीवास्तव से 2 करोड़
तारामंडल निवासी एडी द्विवेदी से 3 करोड़
तारामंडल निवासी सत्यम सिंह से 1.5 करोड़
आजाद चौक निवासी अरुण सिंह से 71 लाख
सहबाजगंज निवासी संतोष सिंह से 60 लाख
खलीलाबाद निवासी संदीप जायसवाल से 30 लाख
गोरखपुर शहर निवासी शिवेंद्र प्रताप सिंह से 8 लाख

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