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धर्म विशेष-धनतेरस के दिन करें ये काम, होंगे ये बड़े लाभ

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान ।दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो ।धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः।।
धनतेरस के दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वन्तरी के साथ श्रीगणेश, कुबेर देव की पूजा की जाती है। धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह शुक्रवार 25 अक्टूबर 2019 को है। धनतेरस का महत्व
साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सप्त धान्यों की पूजा की जाती है. सप्त धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सप्त धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्ण पुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्य के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है. साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.
धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था. धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव है. यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बडी-बडी योजनाएं प्रारम्भ की जाती है. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है.
धनतेरस में क्या खरीदें
लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.
इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है. इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है. इसके साथ ही इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है. दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.
धन तेरस पूजन
धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान करते हुए, भगवान कुबेर को फूल चढाएं और ध्यान करें, और कहें, कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ.
इसके बाद धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें. और निम्न मंत्र का जाप करें.

कुबेर मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहाl

धन धान्य और समृद्धि के स्वामी श्री कुबेर जी का यह 35 अक्षरी मंत्र है। इस मंत्र के विश्रवा ऋषि हैं तथा छंद बृहती है भगवान शिव के मित्र कुबेर इस मंत्र के देवता हैं। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। इस मंत्र को उनका अमोघ मंत्र कहा जाता है। माना जाता है कि तीन महीने तक इस मंत्र का 108 बार जाप करने से घर में किसी भी प्रकार धन धान्य की कमी नहीं होती। यह मंत्र सब प्रकार की सिद्धियां देने पाने के लिये कारगर है। इस मंत्र में देवता कुबेर के अलग-अलग नामों एवं उनकी विशेषताओं का जिक्र करते हुए उनसे धन-धान्य एवं समृद्धि देने की प्रार्थना की गई है। यदि बेल के वृक्ष के नीचे बैठ कर इस मन्त्र का एक लाख बार जप किया जाये तो धन-धान्य रुप समृद्धि प्राप्त होती है।
. कुबेर धन प्राप्ति मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
धन प्राप्ति की कामना करने वाले साधकों को कुबेर जी का यह मंत्र जपना चाहिये। इसके नियमित जप से साधक को अचानक धन की प्राप्ति होती है।
कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
कुबेर और मां लक्ष्मी का यह मंत्र जीवन की सभी श्रेष्ठता को देने वाला है, ऐश्वर्य, लक्षमी, दिव्यता, पद प्राप्ति, सुख सौभाग्य, व्यवसाय वृद्धि, अष्ट सिद्धि, नव निधि, आर्थिक विकास, सन्तान सुख उत्तम स्वास्थ्य, आयु वृद्धि, और समस्त भौतिक और परासुख देने में समर्थ है। शुक्ल पक्ष के किसी भी शुक्रवार को रात्रि में इस मंत्र की साधना शुरू करनी चाहिये।
प्रदोष काल:-
सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है.
धनतेरस के शुभ मुहूर्त
तिथि – 25 अक्टूबर 2019, शुक्रवार
पूजन मुर्हूत – 19 बजकर 8 मिनट से 20 बजकर 13 मिनट तक
प्रदोष काल – 17 बजकर 38 मिनट से 20 बजकर13 मिनट तक
वृषभ काल – 18 बजकर 50 मिनट से 20 बजकर 45 मिनट तक
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ – 25 अक्टूबर 2019 को 19 बजकर 8 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त – 26 अक्टूबर 2019 को 15 बजकर 46 मिनट तक
चोघडिया, दिन
चर-06:37 – 08:03 शुभ
लाभ- 08:03 – 09:30 शुभ
अमृत-09:30 – 10:56 शुभ
काल-10:56 – 12:22 अशुभ
शुभ-12:22 – 13:49 शुभ
रोग-13:49 – 15:15 अशुभ
उद्वेग-15:15 – 16:42 अशुभ
चर -16:42 – 18:08 शुभ
चोघडिया, रात
रोग-18:08 – 19:42 अशुभ
काल-19:42 – 21:15 अशुभ
लाभ- 21:15 – 22:49 शुभ
उद्वेग-22:49 – 24:23 अशुभ
शुभ-24:23- 25:56शुभ
अमृत-25:56- 27:30शुभ
चर- 27:30- 29:04शुभ
रोग-29:04- 30:37 अशुभ
उपरोक्त में लाभ समय में पूजन करना लाभों में वृ्द्धि करता है. शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में शुभता आती है. सबसे अधिक शुभ अमृ्त काल में पूजा करने का होता है.
ज्योतिष विद्वान पंडित अतुल शास्त्री का कहना है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 25 अक्टूबर दिन शुक्रवार को धन की देवी के उत्सव का प्रारंभ हो जाएगा। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में यम को तिल तेल का दीपक घर के बाहर दक्षिण मुख कर रखने से काल-संकट, रोग, शोक, भय, दुर्घटना, मृत्यु से बचा जा सकता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कलश के साथ भगवान धनवंतरि का अवतरण हुआ। उसी प्रतीक में ऐश्वर्य, धन, सौभाग्य, सुख आदि वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा है।
धनतेरस इस बार 25 अक्टूबर शुक्रवार को प्रदोष त्रयोदशी तिथि में मनाया जाएगा। शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। ज्योतिष विद्वानों का मत है कि धनतेरस अबूझ मुहूर्त है। इसी दिन स्वास्थ्य के देवता भगवान धनवंतरि की जयंती भी मनाई जाती है। धनतेरस के दिन शुक्रवार दिन शुक्र प्रदोष भी विद्यमान रहेगा। इसीलिए इस दिन शुक्र प्रदोष और धन त्रयोदशी का महासंयोग बन रहा है। इसके अलावा इस दिन ब्रह्म व सिद्धि योग भी बन रहे हैं। ऐसा महासंयोग शताब्दी वर्षों के बाद दोबारा बन रहा है। इस दिन जो भी शुभ कार्य व खरीदारी की जाए, वह समृद्धिकारक होती है। इस दिन झाड़ू खरीदने की अनोखी परम्परा है। मान्यता है कि इस दिन झाड़ू खरीदने से दरिद्रता दूर होती है। धनतेरस के दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, सोना, चांदी, रत्न आदि की खरीदारी की जाती है ।
धनतेरस पर आभूषण के साथ नए सामानों की खरीदारी काफी शुभ फलदायक होती है। इस पर यदि राशि के हिसाब से खरीद की जाए तो धन की वर्षा होती है। ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि धनतेरस पर नए सामानों की खरीद की परम्परा वर्षों पुरानी है और इस बार काफी अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जो जनमानस के लिए शुभ फल देने वाला है।
वृष लग्न- शाम 07:00 से 08:56 बजे
गुली मुहूर्त- सुबह 07:09 से 08:44 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:11 से 11 :56 बजे तक
स्थिर लग्न – प्रात: 07:07 से 09:15 बजे तक
राशि के अनुसार करें खरीदारी, होगी भाग्य में वृद्धि

मेष – चांदी या तांबा के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान
वृष – चांदी या तांबे के बर्तन
मिथुन – स्वर्ण आभूषण, स्टील के बर्तन, हरे रंग के घरेलू सामान, पर्दा
कर्क – चांदी के आभूषण, बर्तन
सिंह – तांबे के बर्तन, वस्त्र, सोना
कन्या – गणेश की मूर्ति, सोना या चांदी के आभूषण, कलश
तुला- वस्त्र, सौंदर्य या सजावट की सामग्री, चांदी या स्टील के बर्तन
वृश्चिक – इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सोने के आभूषण, बर्तन
धनु – स्वर्ण आभूषण, तांबे के बर्तन
मकर – वस्त्र, वाहन, चांदी के बर्तन
कुम्भ – सौंन्दर्य के सामान, स्वर्ण, ताम्र पात्र, जूता-चप्पल
मीन – स्वर्ण आभूषण, बर्तन
उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है. देव धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है. इस दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है. इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है. धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.
ज्योतिष सेवा केंद्र मुंबई संस्थापक पंडित अतुल शास्त्री

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