अन्यजीवन शैलीराष्ट्रीय

सुनो सरकार मुआवजा नहीं ज़िंदगी चाहिए-श्रीगोपाल गुप्ता

शुक्रवार को जब हैदराबाद की डा. दिशा की जलाकर हत्या और दुष्कर्म के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने का देश जश्न मनाकर खुशी का इजहार कर रहा था उसी दिन देश की एक अन्य बेटी ने दुष्कर्मियों द्वारा जलाये जाने के कारण दिल्ली एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. देश और देश का अवाम अजीब दुविधापूर्ण स्थिति में आ गया कि डा. दिशा के हत्यारे दुष्कर्मियों के मारे जाने का जश्न मनाए या उन्नाव की बेटी की अनचाही मौत का मातम मनाये? दुष्कर्म और जिंदा जलाये जाने पर मौत के आगोश में सो जाने के बाद निक्कमी और निर्लज्ज सरकार का उसकी बोली और अपने आपको पाक-साफ दिखाने की बेहूदा कोशीश शुरु हो गई. वही पुराना घिसा-पिटा सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता का फार्मूला एक पुनः परवान चढ़ने लगा. 25 लाख रुपयों का एक चेक, प्रधानमंत्री आवास योजना में एक पक्का मकान,पीड़िता के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और परिवार को शस्त्रों के लाइसेंस. सवाल ये उठता है कि 90% प्रतिशत दुष्कर्मियों द्वारा बलात जलाई गई बेटी ने लाखों रुपये, सरकारी नौकरी, प्रधानमंत्री आवास योजना में एक पक्का मकान और शस्त्रों के लाइसेंस सरकार से कब मांगे, वो अभागी जिसने अपनी जिंदगी को तरीके से जीना और संसार को ढंग से देखना भी नहीं सीखा उससे पहले ही उसे बेहरम हब्सी दरिंदों ने जिंदा जला कर मार दिया ! उसने तो सरकार और कानूनों के रखवालों से अपने साथ हुये अन्याय के प्रति न्याय की मांग की थी मगर उसे इसके बदले क्या मिला? सिसकती और घसिटती जिंदा मौत जिसकी कलपना करना किसी के लिए भी कष्टदायक होता है. वो बेटी तो 90% प्रतिशत जली कष्ट की अवस्था में दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में बिस्तर पर पड़ी हुई अपने भाई की बांह पकड़ कर जिंदा रखने की गुहार लगा रही थी.उसके साथ घटी अति कष्टकारक जघन्य कुकृत्य की घटना बताती है कि यदि समय रहते हुये कानून के रखवाले और सरकार ने उसकी करुण पुकार सुन ली होती तो आज शायद वो जिंदा होती और कानून के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रही होती? मगर सियासतदानों व रसूखदारों की जेब की शोभा और हाथों की कठपुतली बनती जा रही उत्तरप्रदेश पुलिस की अवस्था को देखकर लगता है कि अब उसे पुलिस के इंकलाव की बुलंदी के ख्याल से कोई सरोकार नहीं रह गया है? घटनाक्रम तो चिल्ला-चिल्ला कर यही गवाही दे रहा है.

उत्तरप्रदेश के रायबरेली जिले की उन्नाव के थाना लालगंज कोतवाली निवासी उक्त पीड़िता अपने गांव के एक युवक के साथ लगभग एक साल पहले राजधानी लखनऊ के साकेत नगर में रहती थी जहां आपस में कुछ बात होने पर आपस में अनबन और बोलचाल बंद हो गई. बाद में 12 दिसंबर 2018 को सुलह के लिए युवक ने उसे गांव के एक स्थान पर बुलाया और एक अन्य युवक के साथ मिलकर उसे सबक सिखाने के लिए उसके साथ दुष्कर्म कर दिया.पीड़िता 12 दिसंबर को दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाना लालगंज पहुंची मगर कोतवाली पुलिस ने उसकी फरियाद को अनसुना कर दिया. पीड़िता ने अपने साथ हुये दुष्कर्म के खिलाफ 20 दिसंबर को रायबरेली जिले पुलिस अधीक्षक को एक रजिस्टर्ड डाक से शिकायत -पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई, मगर यहां भी उसकी न्याय की गुहार की चिठ्ठी डेस्टविन की होकर रह गई. मगर पुलिस के इस शर्मनाक रवैये से हार नहीं मानी और उसने रायबरेली अपर मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट की कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने की फरियाद कर दी. कोर्ट ने उसके मर्म और दुःख को समझकर 5 जनवरी 2019 को थाना लालगंज को दुष्कर्म का मुकदमा तत्काल दर्ज करने के आदेश दिये. मगर रसूखदारों का खौफ और पुलिस की जिद्द देखिये कि फिर भी पुलिस ने मामला दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई. मगर जब उसने 26 फरवरी को कोर्ट में अवमानना का नोटिस दिया तब कहीं जाकर पुलिस नींद में से जागी और 5 मार्च को दोंनो आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया जा सका. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मामला दर्ज करने की रस्म अदायगी के बाद पुलिस बिना आरोपियों की गिरफ्तारी के फिर कुंभकर्णी नींद में सो गई. जब फरियादी ने 5 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी के दरबार में पेश होकर उनसे फरियाद की तब कहीं जाकर दोंनो आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया. पुलिस के नकारापन के कारण गत 25 नवंबर को दोंनो आरोपियों को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई. जिसके बाद गुरुवार को अपने केस के सिलसिले में रायबरेली जाते समय सुबह तड़के दोंनो आरोपियों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर पीड़िता की डंडों से पिटाई कर किरासन तेल डालकर आग लगा दी, जिससे वो 90%प्रतिशत जल गई और जली हुई अवस्था में उसने एक किलोमीटर भागते हुये शोर मचाया. उसकी अत्याधिक गंभीर स्थिति को देखते हुये एयर एम्बुलेंस से दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में शिफ्ट किया गया जहां शुक्रवार को देर शाम को उसकी दर्रनाक मौत हो गई. यदि घटना की निशपच्छ जांच की जाये तो कोई कारण नहीं है कि लालगंज थाना पुलिस और पुलिस अधीक्षक दोनों दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों से कम आरोपी नहीं हैं. दुष्कर्म की घटना से लेकर उसे जिंदा जला देने के लिए पुलिस ने आरोपियों का भरपूर पूरा साथ दिया तो ऐसे में अपराधी की मदद करने वाला भी अपराधी होता है तो पुलिस पर भी मामला दर्ज होना चाहिए. और सुनो सरकार ऐसे जघन्य कुकृत्य जैसे नारकीय जुल्म से जूझ रही बेटियों को आपके मुआवजे, आर्थिक सहायता या एयर एम्बुलेंसों की जरुरत नहीं है, उन्हें जरुरत है समय पर अपराधी को कठोर दंड और उन्हें जिंदगी, जिसकी वे हकदार हैं.

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