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सूअर का मांस होने पर भी कबूल होगी कोरोना वैक्सीन, अरब के सर्वोच्च इस्लामी संगठन का फतवा !

कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया के कई मुस्लिम देशों में घमासान मचा है. इन देशों के इस्लामिक धर्म गुरुओं ने ऐलान कर दिया है कि कोरोना वैक्सीन में सुअर का मांस इस्तेमाल किया गया है. इसके लगवाने से धर्म नापाक हो जाएगा. इंडोनेशिया जैसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में इसे लेकर चिंता पसर गई है साथ ही दुनिया के कई मुस्लिम देशों में भी वैक्सीन न लगवाने का बात कही जा रही है. ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था यूएई फतवा काउंसिल ने कहा है कि अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन में सुअर से बनने वाला जिलेटिन भी मौजूद हो तो भी मुसलमान उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. बता दें कि अधिकतर वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन होता है और इस वजह से कहा जा रहा था कि तमाम मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं की वजह से कोरोना वैक्सीन से दूरी बना सकते हैं. इस्लाम में सुअर के मांस से बने उत्पादों का उपभोग करना हराम माना गया है.
न्यूज एजेंसी एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, काउंसिल के चेयरमैन शेख अब्दुल्ला बिन बय्या ने कहा, अगर कोई और विकल्प नहीं है तो कोरोना की वैक्सीन को लेकर इस्लाम में सुअर को लेकर लगाए गए प्रतिबंध लागू नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि मानव शरीर को सुरक्षित करने के लिए इसकी सख्त जरूरत है. काउंसिल ने कहा कि वैक्सीन के मामले में पोर्क जिलेटिन मेडिसिन की कैटिगरी में आता है ना कि खाने की श्रेणी में. कोरोना वायरस पूरे समाज के लिए ही बहुत बड़ा खतरा बनकर आया है, ऐसे में वैक्सीन बेहद जरूरी है.
कई मुस्लिम देशों में कोरोना की वैक्सीन को लेकर ऐसी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं. अक्टूबर महीने में इंडोनेशिया के कुछ डिप्लोमैट और मुस्लिम स्कॉलर्स चीन में एक प्लेन से अचानक उतर गए. मुस्लिम स्कॉलर्स की चिंता थी कि इस्लामिक कानून के तहत कोरोना की वैक्सीन लगवाने की इजाजत नहीं है.

पोर्क से मिलने वाला जिलेटिन का इस्तेमाल वैक्सीन को स्टोरेज और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रखने के लिए किया जाता है. सऊदी अरब और मलेशिया की एजे फार्मा बिना जिलेटिन वाली वैक्सीन पर काम भी कर रही हैं. फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि उनकी कोरोना वैक्सीन में पोर्क उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है. हालांकि, वैक्सीन की सीमित उपलब्धता के चलते कई मुस्लिम देश जिलेटिन वाली वैक्सीन का इस्तेमाल करेंगे.

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बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने लेकर चिंता जाहिर की जा रही है. साल 2018 में, इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल ने कहा था कि चेचक और रूबेला वैक्सीन में जिलेटिन मौजूद है इसलिए ये हराम हैं. धार्मिक नेताओं ने इसके बाद अभिभावकों से बच्चों को वैक्सीन ना लगाने की अपील करनी शुरू कर दी थी. हालांकि, काउंसिल ने बाद में वैक्सीन लगवाने की इजाजत दे दी थी. लेकिन टैबू के चलते वैक्सीनेशन रेट काफी कम रही. इंडोनेशिया की सरकार ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की खरीदारी में वह मुस्लिम संगठनों को भी शामिल करेगी ताकि वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में बाद में कोई समस्या ना हो.
दरअसल, यहूदियों में भी पोर्क खाने पर प्रतिबंध है लेकिन ये केवल प्राकृतिक रूप से सेवन को लेकर है. कुछ संगठनों का कहना है कि अगर आपके शरीर में इसे इंजेक्ट किया जाता है तो फिर इसमें कोई समस्या नहीं है, खासकर जब ये कोरोना जैसी महामारी के नियंत्रण को लेकर है.

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