- दूसरे दलों को छोड़कर दर्जनों लोगों ने ग्रहण की सदस्यता, राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर; 1 नवंबर को लखनऊ में प्रस्तावित महासम्मेलन के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
खलीलाबाद संतकबीरनगर। कायस्थ समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और समाज की उपेक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के उद्देश्य से कायस्थ पार्टी ने संतकबीरनगर में संगठन विस्तार की पहल की है। खलीलाबाद स्थित एक होटल में जिलाध्यक्ष सुनील कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दर्जनों लोगों ने दूसरे राजनीतिक दलों को छोड़कर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष हिरोशिमा श्रीवास्तव के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी भी रही। बैठक में ऊषा श्रीवास्तव को महिला प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय शंकर श्रीवास्तव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने समाज के लोगों से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत बनाने तथा सामाजिक मुद्दों को लोकतांत्रिक मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाने का आह्वान किया।
राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की चुनौती
बैठक में राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रमन श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी समाज की संगठित शक्ति उसकी एकजुटता, जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से तय होती है। उनके मुताबिक, शिक्षा, प्रशासन, साहित्य और न्यायपालिका समेत विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कायस्थ समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए संगठित प्रयास करने की जरूरत है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और घर-घर संपर्क कर लोगों को पार्टी से जोड़ने की अपील की। साथ ही युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने पर जोर दिया।
हालांकि, राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के इस आह्वान के बीच पार्टी के सामने संगठनात्मक विस्तार को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलने की चुनौती भी रहेगी। सदस्यता अभियान और बैठकों से संगठन का आधार बढ़ सकता है, लेकिन इसका प्रभाव कितना व्यापक होगा, यह स्थानीय स्तर पर निरंतर सक्रियता, ठोस मुद्दों और जनसमर्थन पर निर्भर करेगा।
ऊषा श्रीवास्तव ने उठाया उपेक्षा का मुद्दा
महिला प्रकोष्ठ की नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा श्रीवास्तव ने कहा कि कायस्थ समाज लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का सामना करता आया है। उन्होंने समाज के अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के लिए संगठित होकर आवाज उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने महिलाओं से भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने और समाज को एकजुट करने की अपील की।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अपराजिता सिन्हा ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों से समाज की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने कायस्थ समाज के साथ दबे-कुचले और वंचित वर्गों की समस्याओं को भी उठाते हुए अधिकारों के प्रति जागरूकता और एकजुटता पर जोर दिया।
लखनऊ महासम्मेलन पर टिकी नजरें
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आलोक सिन्हा ने बताया कि कायस्थ पार्टी की ओर से आगामी 1 नवंबर 2026, रविवार को लखनऊ में महासम्मेलन प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्रत्येक जिले से एक हजार कायस्थों की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
अब इस महासम्मेलन की सफलता संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी होगी। पार्टी ने बड़े स्तर पर भागीदारी जुटाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इस लक्ष्य के अनुरूप वास्तविक उपस्थिति और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ही संगठन की तैयारियों की तस्वीर स्पष्ट करेगी।
कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सचिव दीपेंद्र सिन्हा, राष्ट्रीय प्रवक्ता संदेश सावंत, गोरखपुर मंडल अध्यक्ष डॉ. पवन श्रीवास्तव, बस्ती मंडल अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव, मंडल सचिव मोहन श्रीवास्तव, बस्ती जिलाध्यक्ष डॉ. रत्नेश श्रीवास्तव, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष प्रतिष्ठा श्रीवास्तव, नगर अध्यक्ष अर्पित श्रीवास्तव सहित डॉ. सलोनी श्रीवास्तव, प्रिया श्रीवास्तव, मीना श्रीवास्तव, बीना श्रीवास्तव, सुहानी श्रीवास्तव, पूजा श्रीवास्तव, रतन प्रिया श्रीवास्तव, श्याम मोहन श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, पवन कुमार श्रीवास्तव, राम सुरेश श्रीवास्तव, परमात्मा लाल श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, विवेक कुमार श्रीवास्तव, धीरज श्रीवास्तव और सौरभ सिन्हा समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, संतकबीरनगर की बैठक में कायस्थ पार्टी ने संगठन विस्तार, महिला नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी को अपने प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखा। अब देखना होगा कि सदस्यता अभियान और प्रस्तावित महासम्मेलन के जरिए पार्टी समाज के बीच अपनी पहुंच को किस हद तक व्यापक बना पाती है।

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