Review Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
ऋषिकेश। खेल के मैदान पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उनकी उपलब्धियों के प्रति संस्थागत सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का माध्यम भी मानी जाती है। लेकिन जब यही अवसर दिव्यांग यानी पैरा खिलाड़ियों के लिए स्पष्ट न हो, तो सवाल केवल नियुक्ति का नहीं, बल्कि समान अवसर और सम्मान की व्यवस्था का बन जाता है।
पैरा इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी और ऋषिकेश निवासी नीरजा गोयल ने इसी मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और खेल मंत्री रेखा आर्या को प्रार्थना पत्र भेजकर दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी नियुक्ति की स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
नीरजा गोयल ने उत्तराखंड खेल विभाग की ओर से उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किए जाने को सकारात्मक पहल बताया है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया है कि इस व्यवस्था में पैरा खिलाड़ियों के लिए अवसर और पात्रता को लेकर स्पष्टता क्यों न हो, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी समान आधार पर सरकारी रोजगार का अवसर मिल सके।
उनका कहना है कि दिव्यांग खिलाड़ी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद नियमित अभ्यास, प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण के कठिन दौर से गुजरते हुए देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे खिलाड़ियों के लिए खेल उपलब्धि हासिल करना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कई अतिरिक्त चुनौतियों से भरा होता है। इसके बावजूद यदि खेल के बाद रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए उन्हें अलग से संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नीरजा गोयल ने अपने प्रार्थना पत्र में भावनात्मक सवाल भी उठाया है कि जब दिव्यांग खिलाड़ी देश के लिए पदक और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं, तो उनकी इन उपलब्धियों को सरकारी रोजगार के अवसर से जोड़ने में बार-बार आवाज उठाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
उनकी मांग है कि पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियों को केवल सम्मान, प्रमाण-पत्र या मंच तक सीमित न रखा जाए। उन्हें उनकी खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवा और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर भी मिलना चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की किसी भी नीति की वास्तविक कसौटी केवल सामान्य खिलाड़ियों तक सीमित नहीं हो सकती। यदि दिव्यांग खिलाड़ी समान स्तर की प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो उनके लिए सरकारी नियुक्ति की पात्रता, प्रक्रिया और अवसर भी स्पष्ट, पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित होना जरूरी है।
नीरजा गोयल ने सरकार से मांग की है कि पैरा खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न नियुक्ति को लेकर स्पष्ट नीति या प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि खिलाड़ियों को प्रत्येक उपलब्धि के बाद सरकारी रोजगार के लिए अलग-अलग स्तर पर अपनी बात रखने की आवश्यकता न पड़े।
आखिर सवाल सिर्फ एक खिलाड़ी की नौकरी का नहीं है। सवाल यह है कि देश के लिए पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मान से आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर भविष्य की गारंटी से कब जोड़ा जाएगा?
नीरजा गोयल, पैरा इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी और नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट, ऋषिकेश की संस्थापक हैं।
उपरोक्त समाचार पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल के प्रेस नोट पर आधारित है,


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