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यूपी में कौशल विकास को नई रफ्तार: 936 प्रशिक्षण संस्थाएं एक लाख से अधिक युवाओं को देंगी रोजगारपरक प्रशिक्षण


लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य कौशल विकास निधि (SSDF) योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया है। इस चरण में प्रदेश की 936 प्रशिक्षण संस्थाओं को एक लाख से अधिक युवाओं को आधुनिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्किल इंडिया' विजन को आगे बढ़ाते हुए प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में पहली बार 'AI for All' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल को अनिवार्य किया गया है, ताकि युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित नई तकनीकों से परिचित हो सकें।

सरकार ने प्रशिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई नए प्रावधान लागू किए हैं। सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा, जिनकी निगरानी मुख्यालय स्तर से की जाएगी। आवासीय केंद्रों में प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे प्रशिक्षण, प्रत्येक केंद्र पर हिंदी और अंग्रेजी का एक-एक समाचार पत्र उपलब्ध कराना तथा केवल NCVET/NQR पोर्टल पर सूचीबद्ध जॉब रोल में ही प्रशिक्षण संचालित करने जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

मंत्री ने बताया कि इस बार प्रशिक्षण संस्थाओं को लक्ष्य आवंटित करने के लिए 'कौशल दर्पण' AI डैशबोर्ड का उपयोग किया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) द्वारा प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता के सत्यापन के बाद ही लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया कि लक्ष्य आवंटन का अर्थ प्रशिक्षण शुरू करने की अनुमति नहीं है। मिशन के साथ औपचारिक अनुबंध और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद ही बैच संचालित किए जा सकेंगे।

मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं में 831 निजी, राजकीय और स्टार्ट-अप संस्थानों को 91,425 तथा 105 औद्योगिक एवं न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य दिया गया है। चयनित संस्थाओं को हर हाल में 1 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण शुरू करना होगा। इसके लिए 17 चरणों की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें केंद्र चयन, सत्यापन, बैच अनुमोदन, प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और प्रशिक्षण के बाद एक वर्ष तक अभ्यर्थियों की ट्रैकिंग शामिल है।

समीक्षात्मक दृष्टि

उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल विकास को नई दिशा देने वाला माना जा सकता है। विशेष रूप से AI आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग और प्लेसमेंट ट्रैकिंग जैसे प्रावधान बदलते रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। हालांकि, योजनाओं की वास्तविक सफलता केवल लक्ष्य आवंटित करने से नहीं, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रशिक्षित युवाओं को मिलने वाले रोजगार, उद्योगों से समन्वय और दीर्घकालिक रोजगार स्थिरता पर निर्भर करेगी। पूर्व में भी बड़े पैमाने पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित हुए हैं, इसलिए इस चरण की सफलता का आकलन प्लेसमेंट दर और प्रशिक्षण के वास्तविक प्रभाव के आधार पर ही किया जा सकेगा।

यदि निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन होता है और प्रशिक्षित युवाओं को समयबद्ध रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, तो यह योजना प्रदेश के कौशल विकास मॉडल को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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