(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर । जनपद के दुधारा थाना क्षेत्र में पानी बहाने के विवाद में हुई मारपीट और एक व्यक्ति की मौत के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है, जबकि दूसरे आरोपी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दिया गया है। क्या है पूरा मामला, देखिए यह रिपोर्ट।
संतकबीरनगर के थाना दुधारा क्षेत्र के करमा खान गांव में पानी बहाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया था। इसी मामले में सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी संतराम को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है।
अदालत ने संतराम को पांच वर्ष के साधारण कारावास, 10 हजार रुपये के अर्थदंड तथा जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की आधी राशि मृतक की पत्नी सोना देवी को देने का आदेश भी दिया गया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, घटना 20 जून 2024 की रात करीब साढ़े आठ बजे की है। नहाने के पानी को बहाने और नल के उपयोग को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। आरोप है कि संतराम और उसके साथियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिसमें बीच-बचाव करने आए शम्भू नाथ गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
घटना में मृतक के पुत्र शिवसागर तथा पुत्रियां साधना और वंदना भी घायल हुई थीं। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया था कि घटना के बाद आरोपियों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 9 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिनके आधार पर न्यायालय ने संतराम को दोषी ठहराया।
वहीं, सह-आरोपी शक्तिमान को अदालत ने मारपीट के अपराध में दोषी तो माना, लेकिन उसके आचरण और परिस्थितियों को देखते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान किया। न्यायालय ने उसे एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की शर्त पर 25-25 हजार रुपये के दो जमानती और समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह फैसला एक बार फिर दर्शाता है कि छोटे-छोटे घरेलू विवाद यदि समय रहते नहीं सुलझाए जाएं, तो वे गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं और इसके कानूनी परिणाम वर्षों तक भुगतने पड़ते हैं।

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