(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संत कबीर नगर, 04 अगस्त। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू करने के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनपदीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने की। बैठक में जिले के सभी शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य, प्रबंधक और छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में छात्रवृत्ति आवेदन, सत्यापन, अग्रसारण और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष छात्रवृत्ति वितरण में तकनीकी त्रुटियों को न्यूनतम रखने और पात्र विद्यार्थियों तक समय पर धनराशि पहुंचाने पर विशेष फोकस रहेगा।
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने छात्रवृत्ति की समय-सारिणी एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी, जबकि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने मास्टर डाटा, प्रोफाइल लॉक तथा पोर्टल पर आने वाली तकनीकी समस्याओं के समयबद्ध समाधान पर चर्चा की। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर पात्रता, आयु सीमा और आवेदन संबंधी आवश्यक प्रावधानों की जानकारी दी।
बैठक में सीडीओ ने कहा कि आधार सीडिंग और एनपीसीआई (NPCI) मैपिंग छात्रवृत्ति भुगतान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र छात्र-छात्रा के बैंक खाते में केवल आधार लिंक कराने तक सीमित न रहें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि खाता एनपीसीआई मैपर पर सक्रिय रूप से सीड हो। ऐसा न होने पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि विद्यार्थियों के खाते में नहीं पहुंच सकेगी।
उन्होंने ओटीआर, मास्टर डाटा, प्रोफाइल लॉक, आवेदन सत्यापन और एनपीसीआई मैपिंग सहित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र छात्र-छात्रा छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे।
समीक्षात्मक दृष्टि
बैठक में छात्रवृत्ति वितरण की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की गंभीरता स्पष्ट दिखाई दी, लेकिन यह भी एक तथ्य है कि पिछले वर्षों में आधार सीडिंग, एनपीसीआई मैपिंग और पोर्टल संबंधी त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी थी। ऐसे में केवल समीक्षा बैठक और निर्देश पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि विद्यालय स्तर पर निरंतर निगरानी, बैंकिंग समन्वय और तकनीकी सहायता भी सुनिश्चित करनी होगी।
यदि प्रशासन निर्धारित समय-सीमा का सख्ती से पालन कराते हुए तकनीकी बाधाओं का समय रहते समाधान कर देता है, तो हजारों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ बिना किसी विलंब के मिल सकेगा। वहीं लापरवाही बरतने वाले संस्थानों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक होगा, ताकि छात्रवृत्ति योजना का वास्तविक लाभ पात्र छात्रों तक समय पर पहुंच सके।

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