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गो-आश्रय स्थलों पर डीएम का औचक निरीक्षण: व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर जताई नाराजगी


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। जनपद में संचालित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को परखने के लिए जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सोमवार को सेमरियांवा विकासखंड के जिगिना तथा बेलहर कला के भगौसा गो-आश्रय स्थलों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गोवंशों के स्वास्थ्य, चारे, पानी, साफ-सफाई और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिगिना गो-आश्रय स्थल में निरीक्षण के दौरान तीन गोवंश बीमार मिले, जिनका उपचार पशु चिकित्सक द्वारा कराया जा रहा था। वहीं, 14 गोवंशों को शिवापार गो-आश्रय स्थल में स्थानांतरित करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को दिए गए। जिलाधिकारी ने गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा और अन्य आवश्यक संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान गो-आश्रय स्थल के समीप यूपी सिडको द्वारा निर्मित की जा रही नाली की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। इस पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को जांच समिति गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं, गो-आश्रय स्थल के पीछे स्थित स्वास्थ्य केंद्र की खाली भूमि का उपयोग गौशाला विस्तार के लिए प्रस्तावित करने को भी कहा।

इसके बाद भगौसा गो-आश्रय स्थल के निरीक्षण में जिलाधिकारी ने गोबर की खाद के वैज्ञानिक एवं आर्थिक उपयोग पर बल देते हुए ग्राम प्रधान को इसे वन विभाग, उद्यान विभाग, नर्सरियों अथवा इच्छुक निजी खरीदारों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही, गौशाला में साफ-सफाई की कमी मिलने पर ब्लीचिंग पाउडर और फिनाइल से नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

निरीक्षण के दौरान गो-आश्रय स्थल के सामने स्थित बंजर भूमि की पैमाइश दो दिन के भीतर कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए संबंधित उपजिलाधिकारी और तहसीलदार को निर्देशित किया गया।

यह निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि कई स्थानों पर अभी भी साफ-सफाई, निर्माण गुणवत्ता और संसाधन प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता है। यदि जिलाधिकारी के निर्देशों का समयबद्ध और प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाता है, तो गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होने के साथ गोवंशों के संरक्षण और देखभाल की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार संभव होगा।

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