राष्ट्रपति के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और पत्रकार सुरक्षा कानून की उठी मांग
Report by- IJA Edited by-Mohammad Sayeed Pathan
गोरखपुर। दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग थाना क्षेत्र में तीन महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा कथित दुर्व्यवहार, अभद्रता एवं यौन उत्पीड़न के आरोपों ने पत्रकार समुदाय के बीच चिंता पैदा कर दी है। मामले को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने आवाज बुलंद करते हुए इसे पत्रकारों की गरिमा, महिला सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
संगठन की ओर से राष्ट्रपति के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अतुल श्रीवास्तव को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, आरोपों के आधार पर विधिसम्मत एफआईआर दर्ज करने और महिला पत्रकारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई।
संगठन ने यह भी मांग उठाई कि धरना, प्रदर्शन और समाचार कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार के लिए स्पष्ट मीडिया-पुलिस आचार संहिता बनाई जाए। महिला पत्रकारों से संबंधित पुलिस कार्रवाई में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
‘निष्पक्ष जांच ही न्याय का आधार’
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी पत्रकार, विशेषकर महिला पत्रकार के साथ ड्यूटी के दौरान दुर्व्यवहार या उत्पीड़न का आरोप सामने आना गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जांच तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषी व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि कोई आरोप तथ्यहीन पाया जाता है तो निर्दोष व्यक्ति को भी अनावश्यक प्रताड़ना से बचाया जाना चाहिए।
कुरैशी ने कहा कि “निष्पक्ष जांच ही न्याय का आधार है।” उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि मामले की जांच उच्चस्तरीय निगरानी में कराई जाए और आवश्यकता होने पर स्वतंत्र महिला न्यायिक अधिकारी अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाए।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर
संगठन ने महिला पत्रकारों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी अथवा प्रताड़ना से सुरक्षा देने की मांग की। साथ ही पत्रकारों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकारों की आवाज दबाने या उनकी शिकायतों को लंबे समय तक लंबित रखने से पत्रकार समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उनका कहना था कि पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन आगे भी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
पत्रकार सुरक्षा तंत्र बनाने की मांग
ज्ञापन में केंद्र सरकार से देशभर के पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय तंत्र विकसित करने की मांग की गई। पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न अथवा पुलिस दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। संगठन के अनुसार कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े इस मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री, गृह मंत्रालय के सचिव और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष को भी ईमेल के माध्यम से भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद इरफ़ानुल्लाह खान, मंडल सचिव सतीश चंद्र, जिला प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान, आशुतोष कुमार, अजमेर खान, अवधेश कुमार श्रीवास्तव, ललित कुमार सिंह, श्रवण कुमार गुप्ता, मेराज अहमद, डॉ. वेद प्रकाश निषाद, अमरजीत साहनी, अंशुल वर्मा सहित कई पत्रकार उपस्थित रहे।

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