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संतकबीरनगर में युवा उत्सव की तैयारियों पर डीएम की बैठक, लेकिन असली परीक्षा आयोजन के दिन


  • पंजीकरण से लेकर निर्णायकों के चयन तक हुई समीक्षा, अब देखना होगा युवाओं तक कितनी पारदर्शिता से पहुंचेगा अवसर

Review Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। युवाओं की प्रतिभा को मंच देने और उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित युवा उत्सव की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी अनुज मलिक की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय आयोजन समिति की बैठक हुई। कैंप कार्यालय पर आयोजित बैठक में Cultural Track (युवा उत्सव) तथा VBYLD-2027 से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला युवा कल्याण अधिकारी डॉ. सलोनी गर्ग से आयोजन की तैयारियों की जानकारी लेते हुए प्रतिभागियों के पंजीकरण, प्रतियोगिताओं के आयोजन, निर्णायक एवं मूल्यांकनकर्ताओं के चयन, प्रचार-प्रसार तथा बजट सहित अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

हालांकि, बैठक में तैयारियों की समीक्षा से आगे अब सबसे बड़ा सवाल आयोजन की पारदर्शिता और युवाओं की वास्तविक भागीदारी का है। किसी भी युवा उत्सव की सफलता केवल बैठक, पंजीकरण और प्रतियोगिताओं की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय होती है कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं तक सूचना कितनी प्रभावी ढंग से पहुंची और उन्हें बिना किसी भेदभाव के मंच कितना उपलब्ध कराया गया।

प्रचार-प्रसार पर कितना रहेगा जोर?

युवा उत्सव में अधिक से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रचार-प्रसार महत्वपूर्ण कड़ी है। बैठक में प्रचार-प्रसार की समीक्षा की गई, लेकिन अब यह देखना अहम होगा कि सूचना केवल विभागीय स्तर तक सीमित रहती है या स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण क्षेत्रों और युवा संगठनों तक भी प्रभावी ढंग से पहुंचती है।

यदि प्रतियोगिताओं की जानकारी समय पर युवाओं तक नहीं पहुंची तो प्रतिभाओं का एक बड़ा वर्ग अवसर से वंचित रह सकता है। ऐसे में आयोजन समिति के सामने चुनौती केवल कार्यक्रम आयोजित कराने की नहीं, बल्कि हर पात्र युवा तक अवसर पहुंचाने की भी है।


निर्णायकों के चयन पर रहेगी निगाह

प्रतियोगिताओं में निर्णायक और मूल्यांकनकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। प्रतिभागियों की प्रतिभा का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से हो, इसके लिए निर्णायकों के चयन में पारदर्शिता और विशेषज्ञता जरूरी है।

युवा उत्सव में किस आधार पर निर्णायकों का चयन किया जाता है और प्रतियोगिताओं के परिणामों को लेकर पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाती है, यह भी आयोजन की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

बजट और व्यवस्था भी बड़ी कसौटी

बैठक में बजट एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। ऐसे में आयोजन पर होने वाले सरकारी खर्च और उसके उपयोग को लेकर भी प्रभावी निगरानी जरूरी होगी। युवाओं के लिए निर्धारित संसाधन वास्तव में प्रतिभागियों और आयोजन की गुणवत्ता पर खर्च हों, यही किसी सरकारी युवा कार्यक्रम की सार्थकता मानी जाएगी।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में तैयारियों को लेकर दिशा-निर्देश जरूर दिए गए हैं, लेकिन इन निर्देशों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है, इसकी वास्तविक तस्वीर आयोजन के बाद सामने आएगी।

बैठक में क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी मुकेश, आराधना, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित आयोजन समिति के नामित सदस्य एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि युवा उत्सव महज सरकारी कैलेंडर का एक आयोजन बनकर रह जाता है या वास्तव में संतकबीरनगर की ग्रामीण और प्रतिभाशाली युवा शक्ति को आगे बढ़ने का प्रभावी मंच उपलब्ध करा पाता है।

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