‘जनता की सुनवाई नहीं होना असली समस्या’—जनभागीदारी, जरूरत आधारित फैसलों और जवाबदेही को बनाया राजनीतिक एजेंडा; प्रशासनिक अनुभव को वोटों में बदलना होगी बड़ी चुनौती
Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक नाम सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 15 अक्टूबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ की घोषणा करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है। प्रशासनिक सेवा से राजनीति तक का उनका सफर अब एक नए मोड़ पर है। उन्होंने अपनी राजनीतिक सोच के केंद्र में जनता की भागीदारी, लोगों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर फैसले और सरकार की जवाबदेही को रखा है।
दिव्या मित्तल का कहना है कि देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, बल्कि आम लोगों की समस्याओं को सुनने और उनकी जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने की कमी है। उनका दावा है कि ‘जननीति भारत’ में जनता केवल चुनाव के समय मतदाता बनकर नहीं रहेगी, बल्कि नीतियां बनाने और सरकारी कामकाज पर सवाल पूछने की प्रक्रिया में भी उसकी भूमिका होगी। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों और जनसंपर्क की तैयारियों में जुटने लगे हैं।
तीन वचनों के सहारे जनता से जुड़ने की कोशिश
दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी की विचारधारा को तीन प्रमुख वचनों के रूप में सामने रखा है। पहला, नीतियों के केंद्र में आम नागरिकों को रखना और उनकी वास्तविक समस्याओं के आधार पर योजनाएं तैयार करना। दूसरा, विकास संबंधी फैसले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लेना। तीसरा, सरकारी योजनाओं, बजट और विकास कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाकर जवाबदेही सुनिश्चित करना। <Cite refs={["turn774567news11","turn774567news14"]}/>
इन वादों में किसानों, छोटे कारोबारियों, महिलाओं और स्थानीय स्तर पर विकास संबंधी समस्याओं का उल्लेख महत्वपूर्ण है। दिव्या मित्तल की राजनीतिक अवधारणा यह संकेत देती है कि वह सरकारी व्यवस्था को केवल ऊपर से नीचे तक चलने वाली प्रक्रिया के बजाय नागरिकों की जरूरतों से जोड़ना चाहती हैं। लेकिन इन विचारों को व्यवहार में उतारने के लिए केवल घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए स्पष्ट नीतियां, संगठनात्मक ढांचा, सक्षम उम्मीदवार और शिकायतों के समाधान की व्यावहारिक व्यवस्था भी जरूरी होगी।
प्रशासनिक अनुभव कितना बनेगा राजनीतिक ताकत?
दिव्या मित्तल वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने संतकबीरनगर और मिर्जापुर सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद उनका राजनीति में प्रवेश इस कारण भी चर्चा में है कि उन्हें सरकारी योजनाओं, जिला प्रशासन और स्थानीय समस्याओं से जुड़े कामकाज का अनुभव रहा है। <Cite refs={["turn774567news8","turn774567news15"]}/>
हालांकि, प्रशासनिक अनुभव और चुनावी राजनीति दो अलग-अलग क्षेत्र हैं। प्रशासन में निर्णय लेने की जिम्मेदारी पद और निर्धारित अधिकारों से जुड़ी होती है, जबकि राजनीति में जनता का विश्वास हासिल करने, विभिन्न सामाजिक समूहों से संवाद बनाने, कार्यकर्ताओं का संगठन खड़ा करने और चुनावी प्रतिस्पर्धा में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की चुनौती होती है। इसलिए दिव्या मित्तल के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि क्या उनका प्रशासनिक अनुभव व्यापक जनसमर्थन और मजबूत राजनीतिक संगठन में बदल पाएगा।
2027 के चुनाव में नई पार्टी के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ना किसी नई पार्टी के लिए आसान नहीं है। प्रदेश में पहले से स्थापित राजनीतिक दलों के पास संगठन, कार्यकर्ता, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी अनुभव मौजूद हैं। ऐसे माहौल में ‘जननीति भारत’ को अपनी विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी नीतियां मौजूदा व्यवस्था से किस तरह अलग होंगी और जनता की समस्याओं का समाधान किस प्रक्रिया से किया जाएगा।
नई पार्टी के लिए उम्मीदवारों का चयन, संसाधनों की व्यवस्था, क्षेत्रवार मुद्दों की पहचान और मतदाताओं के बीच निरंतर संपर्क भी निर्णायक महत्व रखेंगे। चुनाव में उतरने की घोषणा एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन चुनावी सफलता का आकलन केवल घोषणा के आधार पर नहीं किया जा सकता।
क्या जनता को मिलेगा चुनाव के बाद भी सवाल पूछने का अधिकार?
दिव्या मित्तल की घोषित राजनीतिक सोच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चुनाव के बाद भी जनता की भागीदारी और सरकारी कामकाज की जवाबदेही पर जोर देना है। सामान्यतः चुनावी राजनीति में मतदाता की भूमिका मतदान के दिन सबसे अधिक दिखाई देती है, जबकि जनसमस्याओं के समाधान और विकास कार्यों की निगरानी के लिए लगातार संवाद की आवश्यकता होती है।
ऐसे में ‘जननीति भारत’ की विश्वसनीयता इस बात से तय होगी कि पार्टी जनता की भागीदारी को केवल राजनीतिक नारे तक सीमित रखती है या इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था भी बनाती है। विकास कार्यों की लागत और समय-सीमा सार्वजनिक करना, शिकायतों की स्थिति बताना और लिए गए फैसलों का आधार स्पष्ट करना जैसे उपाय जवाबदेही को व्यवहार में बदल सकते हैं।
फिलहाल दिव्या मित्तल ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान कर अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है। हालांकि, उनकी पार्टी का संगठन किस स्तर तक तैयार होगा, किन क्षेत्रों में उसे समर्थन मिलेगा और वह किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी—इन सवालों के जवाब आगे की राजनीतिक गतिविधियों से सामने आएंगे।
कुल मिलाकर, ‘जननीति भारत’ की घोषणा उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में एक नए राजनीतिक विकल्प की शुरुआत है। लेकिन इस विकल्प की वास्तविक ताकत उसके नाम या वादों से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी पहुंच, नीतियों की स्पष्टता, संगठन की मजबूती और जवाबदेही के वादे को जमीन पर लागू करने की क्षमता से तय होगी।

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