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Santkabir Nagar News: जनगणना-2027 की तैयारी तेज, 64 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण—अब असली चुनौती आंकड़ों की शुद्धता


  • 32 फील्ड ट्रेनरों का दूसरा बैच 8 से 10 अक्टूबर तक लेगा प्रशिक्षण, तहसील स्तर पर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को करेंगे प्रशिक्षित

Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (Population Enumeration-PE) को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। निर्धारित समयसीमा में गणना प्रक्रिया पूरी कराने के उद्देश्य से खलीलाबाद स्थित प्रभा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में फील्ड ट्रेनरों के दूसरे बैच का प्रशिक्षण शुरू किया गया।

अपर जिलाधिकारी/जिला जनगणना अधिकारी सत्य प्रकाश के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में फील्ड ट्रेनरों को जनगणना की प्रक्रिया, प्रगणकों और सुपरवाइजरों की भूमिका तथा स्वगणना से संबंधित जानकारी दी जा रही है। मास्टर ट्रेनर अमरेश कुमार चौधरी और अखिलेश त्रिपाठी ने सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण के बाद बढ़ेगी जमीनी जिम्मेदारी

दूसरे बैच के तहत 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक 32 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके बाद यही प्रशिक्षित कर्मी तहसील स्तर पर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देंगे।

यानी जनगणना की पूरी प्रक्रिया में फील्ड ट्रेनरों की भूमिका महत्वपूर्ण होने जा रही है। ऊपर से नीचे तक प्रशिक्षण की यह श्रृंखला जितनी मजबूत होगी, जमीनी स्तर पर आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया उतनी ही प्रभावी होने की उम्मीद होगी।

असली सवाल—क्या प्रशिक्षण के बाद गलती की गुंजाइश बचेगी?

जनगणना महज घरों और लोगों की संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है। इससे तैयार होने वाले आंकड़ों का उपयोग भविष्य की योजनाओं, संसाधनों के वितरण और विभिन्न सरकारी नीतियों के निर्धारण में होता है। ऐसे में एक गलत प्रविष्टि या अधूरी जानकारी भी व्यापक स्तर पर असर डाल सकती है।

यहीं प्रशिक्षण की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रगणकों को केवल तकनीकी प्रक्रिया समझाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि अलग-अलग परिस्थितियों में जानकारी कैसे दर्ज की जाए, संदिग्ध या अधूरी जानकारी का समाधान कैसे किया जाए और किसी परिवार या व्यक्ति की जानकारी छूटने न पाए।

स्वगणना भी बड़ी चुनौती

इस चरण में स्वगणना (Self Enumeration) का प्रशिक्षण भी शामिल है। यह व्यवस्था लोगों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर देती है, लेकिन इसके साथ जागरूकता और तकनीकी समझ की चुनौती भी जुड़ी है।

ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम परिचित आबादी के बीच स्वगणना की प्रक्रिया कितनी सहज होगी, यह प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराना और यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि स्वगणना के दौरान गलत अथवा अधूरी जानकारी दर्ज न हो।

अब नजर जमीनी अमल पर

प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण का चरण शुरू कर दिया गया है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता फील्ड में दिखाई देगी। प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को कितनी स्पष्टता से प्रशिक्षित करते हैं, प्रशिक्षण प्राप्त कर्मी घर-घर जाकर जानकारी कितनी सावधानी से दर्ज करते हैं और छूटे हुए परिवारों की पहचान कैसे सुनिश्चित की जाती है—ये सभी सवाल जनगणना की विश्वसनीयता से सीधे जुड़े हैं।

जनगणना-2027 की तैयारी में प्रशिक्षण एक जरूरी कदम है, लेकिन असली परीक्षा प्रशिक्षण कक्ष में नहीं, बल्कि आंकड़े जुटाने के दौरान होगी। प्रशासन के सामने चुनौती केवल समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने की नहीं, बल्कि ऐसी जनगणना सुनिश्चित करने की है जिसके आंकड़ों पर भविष्य की नीतियां भरोसे के साथ आधारित की जा सकें।

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