बालिकाओं और किशोरियों के स्वाथ्य के प्रति सजग है जिले का स्वाथ्य विभाग


राष्‍ट्रीय बालिका शिशु दिवस की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीरें


*बालिका दिवस पर विशेष -


*बालिका उत्‍थान के कार्यक्रमों का हो रहा है फायदा*


- कन्‍या सुमंगला से आर्थिक तो पीयर एजूकेटर्स करती हैं सामाजिक सुदृढ़


 


संतकबीरनगर ।


जिले में बालिकाओं के हितों को लेकर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इनमें बाल्‍यावस्‍था से लेकर बालक को जन्‍म देने तक के विविध कार्यक्रम शामिल हैं। ये कार्यक्रम स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के साथ ही साथ अन्‍य बाल पुष्‍टाहार तथा शिक्षा विभाग के निर्देशन में चलते हैं।


कन्‍या सुमंगला योजना – कन्‍या सुमंगला योजना के तहत बालिका के जन्‍म से लेकर पांच  स्‍तरों तक चरणबद्ध तरीके से 15 हजार रुपए बालिका को दिए जाने का प्रावधान है,  जिसे लेकर अब लोगों के अन्‍दर से कन्‍या शिशु के पालन व पठन पाठन को लेकर उदासीनता दूर हुई है।


आयरन गोलियों का वितरण - बालिकाओं और किशोरियों में खून की कमी को देखते हुए निरन्‍तर उनके स्‍वास्‍थ्‍य की जांच की जाती है। साथ ही हर सप्‍ताह आयरन की गोलियॉ खिलाई जाती हैं, ताकि किशोरियों में एनीमिया की समस्‍या को दूर किया जा सके।


किशोर क्‍लीनिक -जिले में किशोर क्‍लीनिक की स्‍थापना की गई है। यहां पर आकर किशोरियां अपनी परेशानियों के बारे में महिला काउन्‍सलर से चर्चा करती हैं। महिला काउन्‍सलर रेनू श्रीवास्‍तव उनको उचित सलाह देने के साथ ही उनके इलाज की व्‍यवस्‍था भी करती हैं।


किशोर स्‍वास्‍थ्‍य मंच - किशोर स्‍वास्‍थ्‍य मंच के तहत बालिकाओं के लिए गर्ल्‍स कालेजों में किशोर स्‍वास्‍थ्‍य मंच का आयोजन करके विशेषज्ञों की टीम के द्वारा उनकी समस्‍याओं पर खुलकर चर्चा की जाती है। इस साल कुल 12 किशोर स्‍वास्‍थ्‍य मंच लगाए गए हैं। 



पीयर एजूकेटर्स – जिले के 4 ब्‍लाकों पर 54 उपकेन्‍द्रों पर 1080 पीयर एजूकेटर्स हैं । इन पीयर एजूकेटर्स में हर गांव में एक स्‍कूल जाने वाली तो दूसरी स्‍कूल न जाने वाली किशोरी होती है। ये किशोरियों की समस्‍याओं का समाधान उचित पटल पर करवाती हैं।


प्रधानमंत्री मातृ वन्‍दना  योजना – प्रधानमन्‍त्री मातृ वन्‍दना  योजना के तहत एक गर्भवती को विभिन्‍न चरणों में गर्भधारण करने से लेकर बालक के 6 माह के होने तक विविध चरणों में 22,000 से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया  गया है।


भ्रूण हत्‍या रोकने के लिए हुए यह प्रयास
एसीएमओ आरसीएच डॉ मोहन झा बताते हैं कि कन्‍या भ्रूण हत्‍या को रोकने के लिए जिले के 25 अल्‍ट्रासाउण्‍ड सेंटर्स  की निरन्‍तर निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही चार  अल्‍ट्रासाउण्‍ड सेण्‍टर डिपैनलाइज किए गए हैं। वहीं सेमरियांवा में स्थित एक अल्‍ट्रासाउण्‍ड सेण्‍टर को बन्‍द कराकर उसकी मशीन थाने में जमा कराई गई है। उसके खिलाफ मुकदमा न्‍यायालय में चल रहा है। मुखबिर योजना के तहत छापा मारने की योजना बन चुकी है।


 


 


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