मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देने के लिए योगी सरकार ने लगाई मुहर,जमीन को लेने न लेने के फैसले पर वक्फ बोर्ड 24 फरवरी को करेगा फैसला
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने की घोषणा कर दी है। हालांकि वक्फ बोर्ड 24 फरवरी को इस बात पर फैसला करेगा कि उसे जमीन लेनी है या नहीं। वहीं, दूसरी तरफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) इस मामले में क्यूरेटिव पेटीशन दाखिल करने का मन बना रहा है।
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की घोषणा की थी। पीएम मोदी के इस ऐलान के कुछ समय बाद ही यूपी कैबिनेट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने की घोषणा कर दी। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट के बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी। बीते साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अपने बहुप्रतिक्षित फैसले में राम मंदिर ट्रस्ट बनाने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने के लिए कहा था।
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर अहमद फारूकी इस मामले पर बयान देने के लिए मौजूद नहीं थे, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देने के अपने फैसले पर वे कायम हैं। वहीं AIMPLB ने कहा कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड इस फैसले को स्वीकार कर लेता है तो यह समुदाय के इच्छाओं के खिलाफ होगा।
AIMPLB के प्रसिद्ध सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट के गठन के साथ ही अब राम मंदिर पर राजनीति खत्म हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अब सुन्नी वक्फ बोर्ड पर निर्भर करता है कि वह पांच एकड़ जमीन लेते हैं या नहीं। लेकिन मैं चाहता हूं कि बंटवारे की राजनीति अब खत्म हो। अब सरकार को स्वास्थ्य, शिक्षा, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की ओर ध्यान देना चाहिए।
वहीं यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के रूप में देशवासियों को एक उपहार दिया है। उन्होंने कहा कि सबको पता है कि मस्जिद का निर्माण मीर बाकी ने कराया था, जो एक शिया था। इसलिए यह संपत्तियों शियाओं की है लेकिन हमने सुन्नियों के डर से इसपर कभी दावा नहीं किया।
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