संतकबीरनगर जिला जेल का निर्माण लटका, 35.5 करोड़ के इंतजार में


संतकबीरनगर । संतकबीरनगर में बन रहे जिला जेल के निर्माण में पुनरीक्षित बजट का न मिलना बाधक बन रहा है। बजट स्वीकृति के करीब दो साल होने को हैं लेकिन अभी तक धन नहीं मिल सका है। इस कारण निर्माण कार्य में सुस्ती है। हालांकि कार्यदायी संस्था का दावा है कि 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है लेकिन यह सिर्फ कागजी है। अभी काफी काम बाकी है, जिसे पूरा होने में छह महीने का समय लग सकता है।जिला जेल के लिए वर्ष 2012-13 के आगणन के अनुसार धन स्वीकृत हुआ। धन स्वीकृत होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। पहले से चिन्हित भूमि का अधिग्रहण कर 2015 में काम शुरू हुआ। जिस समय काम शुरू हुआ तब शासन ने कार्य पूर्ण होने की तिथि दिसंबर 2017 निर्धारित की थी। शासन ने जेल निर्माण के लिए 123 करोड़ 63 लाख 34 हजार स्वीकृत कर 117 करोड़ 45 लाख 18 हजार जारी कर दिया। काम शुरू हुआ, लेकिन पहले काफी सुस्ती रही। कार्यदायी संस्था और ठेकेदारों की सुस्ती के चलते काम तेजी से नहीं चल पाया। बीच में फर्म ने स्वीकृत धन को कम बताते हुए पुनरीक्षण बजट की फाइल भेज दी।वर्ष 2015 में भेजी गई पत्रावली को शासन ने वापस कर दिया।



 


हालांकि बाद में मार्च 2018 में जेल निर्माण का पुन: आगणन कराया गया और आगणन के बाद पुनरीक्षित बजट को वित्त आयोग की मंजूरी भी मिल गई।दोबारा आगणन में जेल के बजट में 28 करोड़ 33 लाख 88 हजार की वृद्धि हो गई। कुल बजट 152 करोड़ 97 लाख 22 हजार पर पहुंचा गया। अभी तक शासन से धन नहीं मिला है। इस कारण निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है। अब कार्यदायी संस्था को 35 करोड़ 52 लाख चार हजार रुपए अवशेष धनराशि का इंतजार है। संस्था के जुड़े सूत्रों की मानें तो 72 प्रतिशत धनराशि पाकर भी फर्म ने 90 प्रतिशत तक काम पूर्ण कर लिया है। 10 प्रतिशत काम शेष है, उस पर भी काम चल रहा है। धन मिलते ही इसमें और तेजी आ जाएगी। मौके की स्थिति देख लगता है कि अभी छह महीने से भी अधिक का समय लग सकता है।जिलाधिकारी रवीश कुमार गुप्ता ने कहा कि जेल निर्माण जल्द से जल्द पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण किया गया था, जो भी अधूरे कार्य हैं उसे पूर्ण कराने को कहा गया है। धन की कमी निर्माण में बाधक नहीं बनेगी।


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