बहुचर्चित फर्जी गन लाइसेंस मामले में, दो IAS अफसरों को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
बहुचर्चित फर्जी गन लाइसेंस मामले में सीबीआई ने दो अफसरों आईएएस कुमार राजीव रंजन और सेवानिवृत्त केएएस इतरत हुसैन रफीकी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुपवाड़ा जिले में डीसी रहने के दौरान बड़ी संख्या में गैर प्रांतीय लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी करने के मामले में कार्रवाई की गई है। राजीव रंजन इस समय जम्मू विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं।
सीबीआई को जांच के दौरान रंजन और रफीकी की भूमिका के बारे में पता चला था। रंजन 2015 से 2016 तथा रफीकी 2013 से 2015 तक कुपवाड़ा के डीसी रहे थे। सीबीआई ने 2012 से 2016 तक अलग-अलग जिलों के डीसी की ओर से भारी संख्या में हथियार लाइसेंस जारी किए जाने के मामले में 17 मई, 2018 को मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान डीसी रहते हुए इन दोनों अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई थी। इसमें भारी मात्रा में पैसे लेकर लाइसेंस जारी करने का भी खुलासा हुआ था।
सूत्रों के अनुसार मामले में जल्दी ही कुछ और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इनमें 2012 से 2016 तक बारामुला, शोपियां, राजोरी, उधमपुर, डोडा और रामबन जिले में डीसी रह चुके अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
30 दिसंबर को राजीव और इतरत के घर पड़े थे छापे
30 दिसंबर, 2019 को सीबीआई ने आईएएस अधिकारी यशा मुदगल, कुमार राजीव रंजन, इतरत हुसैन रफीकी, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद जुनैद खान, एफसी भगत, फारूक अहमद खान और जहांगीर अहमद के घरों पर छापा मार कर तलाशी ली थी। यशा बिजली वितरण निगम, जम्मू की सीईओ और प्रबंध निदेशक हैं। इससे पहले 10 जुलाई, 2019 को भी जांच एजेंसी ने जम्मू, कठुआ, उधमपुर और श्रीनगर में 11 जगहों पर एक साथ छापा मार कर मामले से जुड़े दस्तावेज बरामद किए थे। इसी आधार पर 30 दिसंबर, 2019 को छापा मारा गया।
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राजस्थान एटीएस ने 2018 में किया था खुलासा
जम्मू-कश्मीर में फर्जी गन लाइसेंस का खुलासा राजस्थान की एटीएस ने 2018 में किया था। एटीएस की सिफारिश पर तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने विजिलेंस को जांच का जिम्मा सौंपा था। मई महीने में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सबसे पहले एटीएस ने 2017 में तत्कालीन मुख्य सचिव बीबी व्यास को इस रैकेट के बारे में पत्र भेजकर सूचना दी थी। इस ऑपरेशन को एटीएस ने जुबैदा नाम दिया था। एटीएस को जांच में 50 से अधिक लोगों के पास जम्मू-कश्मीर से जारी गन लाइसेंस मिले थे, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए थे। एटीएस ने जिन लोगों को पकड़ा था, उनमें एक आईएएस अफसर का भाई भी था। एटीएस को जांच में यह भी पता चला था कि 3,367 सुरक्षाकर्मियों ने भी जम्मू-कश्मीर से गन लाइसेंस हासिल किए हैं।
4.29 लाख लाइसेंस में से 90 फीसदी बाहरियों के
जम्मू-कश्मीर से 4.29 लाख लाइसेंस जारी करने की बात जांच में सामने आई है। इसमें 90 फीसदी लाइसेंस दूसरे राज्य के लोगों को जारी किए गए हैं। कुपवाड़ा, बारामुला, शोपियां, राजोरी, उधमपुर, डोडा और रामबन जिले में सबसे अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं। डोडा, रामबन और उधमपुर जिले से जारी एक लाख 43 हजार 13 लाइसेंस में से एक लाख 32 हजार 321 लाइसेंस दूसरे राज्यों में रहने वालों को जारी किए गए। हालांकि कुपवाड़ा जिले में लाइसेंस से जुड़ी कोई फाइल भी नहीं मिली। टीम इंडिया के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी ने भी यहां से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिसे रद्द कर दिया गया था।
मैटिंग और फर्निशिंग खरीद घोटाले में भी चार्जशीट
फर्जी गन लाइसेंस में गिरफ्तार किए गए इतरत हुसैन रफीकी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में गत शुक्रवार को बारामुला के एंटी करप्शन कोर्ट में चालान पेश किया था। यह मामला 2015 के दौरान सब स्टैंडर्ड मैटिंग और अन्य फर्निशिंग आइटम की खरीद का है। आरोप है कि जिला स्तर की खरीद कमेटी ने मैटिंग और फर्निशिंग आइटम अधिक दामों पर खरीदीं। इससे सरकारी खजाने में सेंधमारी की गई। 15 लाख से अधिक पैसे डीलर को दिए गए। इसमें रफीकी समेत छह अफसरों जिला प्रोग्राम अफसर आईसीडीएस कासिम वानी, गुलाम नबी भट्ट, जिला ट्रेजरी अफसर कुपवाड़ा, इंचार्ज सहायक निदेशक सीएपीडी कुपवाड़ा मुश्ताक अहमद भट्ट, चीफ मेडिकल अफसर रहे अलीम उद दिन भट्ट, इंचार्ज जनरल मैनेजर जिला इंडस्ट्री सेंटर कुपवाड़ा, खुर्शीद अहमद मलिक एग्रो को आपरेटिव मार्केटिंग लिमिटेड के नाम शामिल हैं।
Source amarujala
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