भारत के दो बड़े शहरों में होगा गोकाष्ठ से दाह संस्कार, और  होलिका दहन,, प्रदूषण से मिलेगी राहत


भोपाल, धनंजय प्रताप सिंह। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से शुरू हुआ गोकाष्ठ यानी गाय के गोबर की लकड़ी से दाहसंस्कार और होलिका दहन की पहल बनारस में भी शुरू होने वाली है। भोपाल की पर्यावरण प्रेमी एक समिति के प्रयासों से अब तक नौ हजार दाह संस्कार हो चुके हैं, जिससे 50 एकड़ की हरियाली बचाए जाने का अनुमान है। बीते साल भोपाल में तीन हजार होलिकाएं गोकाष्ठ से दहन की गई थीं। इस बार पांच हजार होलिका दहन गोकाष्ठ से होगा। समिति की यह पहल बनारस व दिल्ली महानगर पालिका को भी रास आई है। दोनों शहरों में समिति के सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। भोपाल के पर्यावरण प्रेमियों द्वारा गठित 'गोकाष्ठ संव‌र्द्घन एवं पर्यावरण संरक्षण समिति गत 16 माहों से इसमें जुटी है। समिति मप्र के कई जिलों में इस गोकाष्ठ का उपयोग बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है।


पिता की अंत्येष्टि से ली प्रेरणा


डॉ. योगेंद्र कुमार सक्सेना, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। दो साल पहले उनके पिताजी की मृत्यु हुई तब उन्होंने उनका लकड़ी से दाह संस्कार किया। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली कि क्यों न दाह संस्कार के लिए गाय के गोबर से बनी लकडि़यों का उपयोग किया जाए।



चंदा कर गोशाला में लगाई मशीन


डॉ. सक्सेना ने भोपाल के श्मशान घाट में संपर्क किया। उन्हें विश्रामघाट समिति से जुड़े समाजसेवी अरण चौधरी, प्रमोद चुघ, हेमंत अजमेरा सहित कुछ लोग मिले। यहीं से गोकाष्ठ का सफर शुरू हुआ। सभी ने 10-10 हजार रुपये का चंदा किया और नजदीक स्थित रामकली गोशाला में गोकाष्ठ बनाने की मशीन लगा दी। यह प्रयोग सफल रहा और पिछले साल ही इस गोशाला को विश्रामघाट समिति ने 27 लाख रुपये का भुगतान किया।



एक दाह संस्कार में एक पेड़ की बलि


वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सक्सेना कहते हैं कि एक दाह संस्कार के लिए चार से पांच क्विंटल लकड़ी लगती है, जिसके लिए एक हरे भरे पेड़ की बलि दी जाती है। लेकिन गोकाष्ठ से अंत्येष्टि में मात्र ढाई क्विंटल में ही दाह संस्कार हो जाता है। यह लकड़ी की तुलना में ज्यादा होती है और सस्ती भी पड़ती है। दिल्ली महानगर पालिका ने भी दिखाई रुचि पर्यावरण के प्रति जागरूकता की इस ज्योति से दूसरे राज्य भी रोशन होना चाहते हैं। भोपाल की समिति को दिल्ली महानगर पालिक निगम ने आमंत्रित किया है। वह भी गोकाष्ठ से दिल्ली के यमुना और आसपास के इलाके को प्रदूषणमुक्त करना चाहता है।


मणिकर्णिका घाट पर भी अंत्येष्टि में होगा इस्तेमाल


भोपाल की तर्ज पर काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट समेत गंगा किनारे के अन्य श्मशान घाटों पर दाह संस्कार के लिए लकड़ी के स्थान पर गोकाष्ठ का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए बनारस नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है। वाराणसी नगर निगम आयुक्त गौरांग राठी ने भोपाल की समिति के सदस्यों को होली के बाद बनारस बुलाया है। उनसे चर्चा कर गोकाष्ठ से दाह संस्कार का ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। महापौर ने कहा, बेहतर कदम महापौर मृदुला जायसवाल ने कहा कि यह बेहतर कदम है। इस दिशा में पहले से नगर निगम ने कदम बढ़ा दिया है। कान्हा उपवन में गोवंशों के गोबर से गोकाष्ठ बनाने का प्लांट लगा दिया गया है।


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