संतकबीरनगर और आसपास दिखा इंद्रधनुषीय नज़ारा, आइये जानते है इसके दिखने के कुछ वैज्ञानिक कारण


संतकबीरनगर । कई वर्षों बाद अपनी  सात रंगों की खूबसूरती बिखेरे  इंद्रधनुष का दर्शन हुआ है,जिसे लोग बड़ी ही उत्सुकता से निहारते रहे ।
वैसे तो अक्सर ये बरसात के दिनों में दिखाई देने वाली खूबसूरत किरणे हैं, लेकिन कुदरत इसे जब चाहे जहाँ दिखा सकता है ।
ऐसा ही नजारा बुधवार दिनाँक 11-03-2020 को शाम को लगभग 5:20 PM से 5:35 PM तक कबीरनगर और आसपास देखने को मिला,देखने वालों ने बताया कि कई वर्षों बाद ऐसा खूबसूरत सात रंगों वाला इंद्रधनुष दिखाई दिया है, तो आइये इंद्रधनुष के बारे में कुछ और जानते हैं ।


कैसे और कहाँ दिखवाई देता है इंद्रधनुष


बारिश की रिमझिम बूंदों के बीच अगर धूप भी हो तो सूर्य की तरफ मुंह कर रहे हों, कहीं न कहीं आपको इंद्रधनुष दिखाई देगा। आप इंद्रधनुष तब देख पाते हैं जब सूरज आपके पीछे होता है और वर्षा आगे बढ़ती है। इसके अलावा विशाल झरनों के पास भी आम तौर पर हमेशा दिन के वक्त इंद्रधनुष दिखाई देता है। इंद्रधनुष तब और साफ दिखायी देता है जब आसमान में काले बादल छाये हों। अक्सर यह देखा जाता है कि इन्द्रधनुष सुबह के समय पश्चिम दिशा मे और शाम के समय पूर्व दिशा में दिखाई पड़ता है।



पुनरावर्ती


कभी कभार एक नहीं, बल्कि दो इंद्रधनुष दिखाई पड़ते हैं। एक ही जगह मौजूद बूंदों के बार-बार धूप के संपर्क में आने पर दो इंद्रधनुष दिखाई पड़ते हैं। पहले इंद्रधनुष से निकली रंगीन रोशनी जैसे ही सफेद में बदलती है, वैसे ही उसका संपर्क दूसरी बूंदों से हो जाता है और फिर प्रकाश अलग अलग रंगों में बंट जाता है, लेकिन उसके रंग उल्टे क्रम में होते हैं।


उम्मीद है कि ऊपर दिए गए विस्तार से आपको पता चल रहा है कि किस कारण से इन्द्रधनुष आकाश में बन जाता है और इसके बनने के लिए किस तरह के पर्यावरण की आवश्यकता होती है।


इन्द्रजात (इंद्रधनुष) यह एक बहुत ही सुंदर प्रकाशीय विविषण की धटना है । इन्द्रणीय कैसे बन जाता है इस बात की ब्याख्या करने के पहले से इस्तेमाल होने वाली वैज्ञानिक तकनीकी के बारे में जान लेते हैं।


कभी-कभी किसी वस्तु को छूने से करंट क्यों लगता है


प्रकाश का विचलन (प्रकाश का फैलाव)प्रति कहता है:


सूर्य के प्रकाश की कोई किरण जब प्रिज्म में से गुजरती है तो वह सात रंगों में विभक्त्त हो जाता है। इसे ही प्रकाश का विक्षेपण कहते हैं। इन्द्रधनुष; प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और पानी की बूंदों में प्रकाश के विक्षेपण के कारण बनता है । इन्द्रधनुष में सात रंगों का स्पेक्ट्रम चाप (चाप) के आकार में हमें आकाश में दिखाई पड़ता है।


इन्द्रणीय के रंगो का क्रम इस प्रकार होता है। लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी, बैंगनी। ज्यादातर लाल सबसे बाहर और बैंगनी सबसे अंदर होता है।


इसका क्रम है; बैनी आहपीनाला


1 है । बैंगनी


२ । नीला


३ । आसमानी


४ । हरा


५ । पीला


६ । नारंगी,


7. लाल


Comments

Popular posts from this blog

मीडिया में बड़े बदलाव की जरूरत ?:- डॉ अजय कुमार मिश्रा

सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा लगायी गयी प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी एवं विकासपरक योजनाओं पर आधारित, तीन दिवसीय प्रदर्शनी का सीडीओ ने किया समापन

डीएम की अध्यक्षता में किसान दिवस : श्री अन्न की खेती के लिए दिया गया जोर