यूपी के दो खाकी मोहकमो में आरपार की लड़ाई, कहां पहुचेगा अंजाम ?
लखनऊ। देश कोरोना वायरस से भयाक्रांत है लेकिन उत्तर प्रदेश में खाकी वर्सेज खाकी के बीच एक दूसरे की इज्जत तार-तार करने की जंग से तापमान गरमा गयी है। एक के बाद एक कर कई कमांडेंट को फर्जी मस्टर रोल बनवाने में दोषी बताकर पुलिस के अफसरों ने जेल की सलाखों में डाल दिया। ठीक उसी तरह,गाजियाबाद के पूर्व कमांडेंट गिरिराज सिंह के खिलाफ भी कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल की सलाखों में डालने की फर्जी स्क्रीप्ट लिख दी गयी है। गाजियाबाद में कलानिधि नैथानी एसएसपी हैं जो पहले लखनऊ के एसएसपी थे। इनके कार्यकाल में ही गुडम्बा थाने में फर्जी मस्टर रोल बनाने का आरोप लगाकर कमांडेंट,लखनऊ सहित उनकी टीम को जेल भेज दिया गया था। मेरे मन में एक सवाल कौंध रहा है। थोड़ी देर के लिये मान लेते हैं कि होमगॉर्ड्स विभाग के कमांडेंट भ्रष्ट हैं। कमांडेंट ही फर्जी मस्टर रोल बनवाने का फर्जीवाड़ा करते चले आ रहे हैं…। तो क्या पुलिस विभाग के एसपी,सीओ,थानेदार और थानों पर मौजूद पुलिसकर्मियों की टीम ईमानदार है ? मेरा सवाल तो सिर्फ डीजीपी साहेब से है। जब कमांडेंट को जेल भेजा गया तो आपने पुलिस विभाग के इन अफसरों को जेल की सलाखों में क्यों नहीं भेजा गया ? बता दें कि होमगॉर्ड्स विभाग से जीडी द्वारा तैयार मस्टर रोल से ही जवानों की ड्यूटी लगायी जाती है। सभी थानों की तरह कविनगर थाने में भी होमगॉर्ड्स विभाग के कर्मचारी उसकी दो कॉपी लेकर थाने गये,वहां से स्वीकृति मिलने, जवानों की सूची पर स्वीकृति देने की मुहर लगने के बाद ही उसे अपने विभाग के कमांडेंट को देते हैं। उसके बाद जवानों की ड्यूटी के आधार पर वेतन देने के लिये कमांडेंट आगे बढ़ाते हैं। थाने पर तैनात दारोगा देखते होंगे कि भेजे गये होमगार्डों की संख्या सही है, उसके बाद ही तो हस्ताक्षर और मुहर लगाने की अनुमति मुंशी को देते होंगे ? फिर कमांडेंट कहां से दोषी हो गया? दोषी तो थाने की पूरी टीम है। जेल तो थाने की पूरी टीम को जाना चाहिये। एनआईसी तो साफ्टवेयर है जिसे सरकार ने ही बनवाया है, इस पर सवाल उठाकर पुलिस विभाग, होमगॉर्ड्स विभाग पर नहीं बल्कि सीधे तौर पर योगी सरकार पर उंगली उठाने का काम कर रही है।
डीजीपी साहेब, सीधी बात करें तो किसी विभाग पर आरोप लगाना बेहद आसान है,यदि दोषी कमांडेंट है तो आप ही बतायें अभी तक यूपी के कितने थानों में तैनात दारोगा के खिलाफ कार्रवाई की गयी ? बार-बार फर्जी मस्टर रोल ने नाम पर जिस तरीके से होमगॉर्ड्स विभाग के अफसरों को जेल भेजने की परंपरा शुरू की गयी है, इसके पीछे सरकार की इमेज खराब करने वाले तथाकथित अफसर घटिया राजनीति कर रहे हैं। आप ये क्यों नहीं सोचते कि बदनाम चाहें होमगॉर्ड्स विभाग हो या फिर पुलिस,मुख्यमंत्री की साख पर ही तो बट्टा लग रहा है। जो दोषी है उसे सजा मिले, लेकिन आईपीएस वर्सेज होमगॉर्ड्स की पुरानी परंपरा पर रोक लगायें नहीं तो यही कहा जायेगा कि योगीराज में सबसे बदरंग अगर कोई है तो वो है खाकी…। फिर चाहें वो पुलिस का हो या फिर होमगा्डर्स का…। बहरहाल,कविनगर,गाजियाबाद में होमगॉर्ड्स विभाग के अफसर और कर्मचारियों के खिलाफ हुये एफआईआर के बाद उ. प्र. होमगॉर्ड्स अधिकारी संघ आरपार के मूड में है। इसी परिपेक्ष्य में अफसरों ने आज मुख्यालय पर आपातकालीन बैठक बुलायी है।
डीआईजी,मुख्यालय रंजीत सिंह का कहना है कि पुलिस विभाग के अफसर षडय़ंत्र के तहत हमारे अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर फंसाने का काम कर रहे हैं। नोयडा,लखनऊ की ही तरह कविनगर में भी फर्जी स्क्रीप्ट तैयार कर पूर्व कमांडेंट गिरिराज सिंह को फंसाने का खेल खेला जा रहा है लेकिन हमलोग ऐसा होने नही देंगे। डीजीआईजी ने साफ शब्दों में कहा कि दोषी पुलिस के अफसर हैं,कार्रवाई उनके खिलाफ होनी चाहिये। एसएसपी,गाजियाबाद कलानिधि नैथानी ने अपर मुख्य सचिव,गृह के आदेश की तौहीन की है इसलिये हमलोग अब सिर्फ मुख्यमंत्री से ही मिलेंगे और पुलिस विभाग द्वारा रचित फर्जी स्क्रीप्ट बनाने और अफसरों को फंसाने की बात उनके सामने रखेंगे । इसकी रणनीति आज बुलायी गयी बैठक में बनायी जायेगी।
अब थोड़ी चर्चाओं पर बात कर लें।होमगॉर्ड्स विभाग मे चर्चा जोरों पर है कि विभाग में तैनात महिला आईपीएस मार्च माह में दिल्ली गयी थीं। वहां से लौटने के बाद ही कविनगर थाने में गाजियाबाद के पूर्व कमांडेंट गिरिराज सिंह के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गयी। अफसरों का इशारा महिला आईपीएस की तरफ है। समझ गये होंगे,वो कौन हैं ? चर्चा इस बात की भी है कि गाजियाबाद के एसएसपी कथानिधि नैथानी जब लखनऊ में एसएसपी थें तो उन्होंने गुडम्बा थाने में होमगाड्र्स विभाग के प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय सहित उनकी टीम पर फर्जी मस्टर रोल बनवाने के मामले में एफआईआर दर्ज करायी थी। आनन-फानन में एफआईआर दर्ज कर दी गयी और रातों-रात कृपाशंकर पाण्डेय को उठाकर जेल भेज दिया गया। विभागीय जांच की गयी तो जितने होमगार्डो को फर्जी दिखाया गया उनकी ड्यूटी विभाग की तरफ से लगायी ही नहीं गयी थी…। वैसे सभी जानते हैं कि यदि पुलिस को यदि किसी को जेल भेजना है तो उस पर स्मैक,गांजा बेचने का लगा देते हैं। जो उनके पास पहले से मौजूद रहता है। ठीक उसी तरह एसएसपी के निर्देश पर गुडम्बा थाने में फर्जी स्क्रीप्ट तैयार की गयी और फर्जी होमगार्डों की ड्यूटी लगाने,फर्जी मस्टर रोल बनवाने के आरोप में कार्रवाई कर दी गयी। यहां भी यदि मान लें कि कमांडेंट और उनकी टीम दोषी है तो गुडम्बा थाने के इंस्पेक्टर और उनकी टीम को जेल क्यों नहीं भेजा गया ? मैं ये नहीं कहता कि प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ईमानदार है लेकिन बात वसूल और नियम-कानून की कर रहा हूं ,इसीलिये सवाल उठाने का दम रख रहा हूं।
अब आते हैं,कविनगर,गाजियाबाद में दर्ज एफआईआर पर। यहां भी एसएसपी कलानिधि नैथानी हैं। स्क्रीप्ट भी लखनऊ की तरह फर्जी लिखी प्रतित हो रही है। जब जून 2019 में थाना मुरादनगर के लिये एनआईसी से थाने में 10 होमगार्डों की ड्यूटी दिखायी गयी है। जिसकी एक प्रति जिला कमांडेंट के पास और एक कापी मुरादनगर पुलिस के पास है। दर्ज एफआईआर में पुलिस के अफसरों ने अपने विभाग के लोगों को बचाने केचक्कर में जबरियन होमगार्डों की फर्जी आमद दर्ज करा दी है। होमगार्ड 1212 यशपाल,1213 जितेन्द्र,1241 सुरेन्द्र,1245 अरूण की जगह पर पुलिस ने अनधिकृत रुप से जबरदस्ती 1204 राजपाल,1296 हरेन्द्र,1235 रविन्द्र का नाम जीडी में दर्ज किया गया है। पुलिस ने जीडी में दिखाया गया है कि 1 जून 2019 से लेकर 30 जून 2019 तक ड्यूटी के लिये आमद दर्ज है। एफआईआर में 1259 सतेन्द्र की आमद के संबंध में कोई स्थिति स्पष्टï नहीं है। इसी तरह,1215 किरन की आमद 1 जून से 6 जून तक जीडी संख्या 19 पर 2 बार दिखायी गयी है। 1214 घनश्याम,1541 ललिता,जिसकी सूची 1 जनवरी 2019 को प्राप्त हो गयी थी,उनकी आमद 2 जून 2019 को दिखायी गयी है। इसी तरह,1547 सुनीता की आमद 3 जून 2019 में भ्रामत तरीके से दिखायी गयी है। एफआईआर में यह भी दिखाया गया है कि मस्टर रोल कमांडेंट द्वारा तैयार किया गया है जो पूरी तरह से गलत है,क्योंकि मस्टर रोल बीओ,कंपनी कमांडर द्वारा तैयार किया जाता है और मस्टर रोल थाने पर तैनात मुंशी-जीडी व इंस्पेक्टर की सहमति के बाद कमांडेंट कार्यालय भेजा जाता है।
कलानैथानी साहेब बेगुनाह साथियों को बचाने के लिये पुलिस के हर हमले का देंगे करारा जवाब …
अब आते हैं असल मुद्दे पर…। एसएसपी कलानैथानी साहेब,बेगुनाहों को फर्जी तरीके से फंसाकर वर्दी पर स्टार का तमगा लगवाने का खेल पुलिस विभाग में कब तक चलेगा ? आपकी पुलिस तो अब अपनी ही जाल में,सॉरी आपकी जाल में बुरी तरह से फंस गयी है। आप साबित करें कि कौन सी गणित लगाकर मुरादनगर थाने के इंस्पेक्टर ने फर्जी होमगार्डों को तैनात कर दिया है। कायदे से तो पहले स्पष्टï करना चाहिये कि राजपाल, रविन्द्र और हरेन्द्र की ड्यूटी कहां पर और कैसे लगायी गयी ? सतेन्द्र कहां पर ड्यूटी कर रहा था,ये स्पष्ट करें ? ये भी स्पष्ट करें कि एक माह में सुनीता ने दो बार नौकरी कहां और कैसे की ? जब घनश्याम और ललिता ने जनवरी में डयूटी की तो आपकी पुलिस ने उन्हें फरवरी में किस नियम के तहत डयूटी करते दिखा दिया। जबकि फरवरी में इनलोगों ने ड्यूटी वहां की ही नहीं ?
नैथानी जी,आपकी चुलबुल पाण्डेय छाप पुलिस तो आपकी बिछायी जाल में खुद फंस गयी है। अब आप इन्हें कैसे बचायेंगे। कायदे से तो गाजियाबाद के पूर्व कमांडेंट गिरिराज सिंह सिंह की जगह मुरादनगर थाने के इंस्पेक्टर सहित पूरी टीम को जेल की सलाखों में जाना चाहिये…। नैथानीजी,इस बार आपका दांव इसलिये उल्टा पडऩे वाला है क्योंकि अब होमगाडर्स विभाग के अफसर आक्रामक मूड में आ गये हैं। अफसरों को फर्जी आरोप में फंसाने वाले पुलिस अफसरों को देंगे करारा जवाब…। उ. प्र. होमगॉर्ड्स अधिकारी संघ के पदाधिकारियों ने मन बना लिया है कि अब पुलिस द्वारा फर्जी आरोप मढक़र अफसरों को फंसाने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे। इसी परिपेक्ष्य में 14 मार्च को गाजियाबाद के कमांडेंट वेदपाल चपराना ने डीएम,गाजियाबाद को पत्र लिखकर इस मामले में दोषी सभी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने एवं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। अब देखना है आगे क्या होता है…
Source tsv
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