COVID19- सिगरेट पीने वाले हो जाएं सावधान,हर कश में बढ़ा रहे है,अपने अंदर संक्रमण का खतरा-:WHO
- दुनिया भर में अब तक 9,38,452 लोग कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में आ चुके हैं. इनमें 47,290 की मौत हो चुकी है, जबकि 1,95,388 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. इस बीच वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसके फैलने के कारणों व अलग-अलग लोगों पर इसके असर का आकलन कर रहे हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि धूम्रपान (Smoking) करने वालों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है.
स्मोकिंग छोड़ने का सबसे सही समय है: डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि शराब और सिगरेट पीने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ये स्मोकिंग छोड़ने का सबसे सही समय है. संगठन ने सिगरेट पीने वालों के लिए चेतावनी जारी की है कि जब तक कोरोना वायरस को काबू नहीं कर लिया जाता है, तब तक स्मोकिंग और तंबाकू सेवन की आदत छोड़ देनी चाहिए. वहीं, यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट के अनुसार, धूम्रपान करने वालों का शरीर अतिसंवेदनशील बन जाता है. वे गंभीर बीमारियों से नहीं लड़ नहीं पाते हैं. स्मोकिंग करने वालों को संक्रमण जल्दी होता है और रिकवरी की उम्मीद स्वस्थ लोगों के मुकाबले कम रहती है. स्मोकिंग फेफड़ों पर बुरा असर डालती है. बता दें कि यह वायरस फेफड़ों तक पहुंचकर ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इसका सीधा मतलब है कि अगर फेफड़े मजबूत नहीं हैं तो वायरस ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा.
धम्रपान से फेफड़ों में बढ़ती है एंजाइम की सक्रियता
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में संक्रमित 80 फीसदी लोगों में वायरस के बहुत कम लक्षण दिखाई दिए, जबकि यूरोप में यह आंकड़ा 70 फीसदी होते हुए भी 10 में 3 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है. संक्रमित होने वाले 70 साल से ज्यादा उम्र वाले मरीजों को हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हार्ट से संबंधित शिकायत थी. ऐसे लोग करोना की चपेट में सबसे ज्यादा आए. इनमें भी पुरुषों की संख्या ज्यादा थी. यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरालीना के शोध में बताया गया कि धूम्रपान करने से फेफड़ों में एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है. ऐसा होने से कोविड-19 के मरीजों की संख्या बढ़ती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले अधिकतर लोगों में इस महामारी के लक्षण के तौर पर सांस लेने में तकलीफ की शिकायत सबसे ज्यादा देखी गई.
धूम्रपान करने वालों निमोनिया का खतरा है दोगुना
चीन के चिकित्सकों ने भी इस मामले में शोध किया. उन्होंने जांच के लिए कोरोना वायरस के करीब 56,000 मरीजों का सैंपल लिया. इसमें पाया गया कि बुजुर्गों की तुलना में धूम्रपान करने वाले लोगों की मौत का आंकड़ा ज्यादा था. उनके मुताबिक, संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए लोगों को धूम्रपान छोड़ देना चाहिए. स्वस्थ लोगों के मुकाबले धूम्रपान करने वालों को निमोनिया का खतरा दोगुना होता है. कोरोना वायरस पीड़ित का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए ताकि शरीर खुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और धूम्रपान से श्वसन प्रणाली, सांस की नली और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचता है. इससे टीबी, फेफड़ों के कैंसर समेत कई घातक रोग होते हैं. कोरोना वायरस भी फेफड़ों पर ही असर डालता है. ऐसे में धूम्रपान से तौबा करना ही समझदारी है
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