कोरोना की मार से आर्थिक गतिविधियां ठप,पानी के भाव हुआ कच्चा तेल
पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल-एक लीटर कच्चे तेल केे दाम एक लीटर पैकेज्ड पानी की बोतल से भी नीचे पहुंच गया है.मौजूदा रेट के मुताबिक एक बैरल कच्चा तेल भारतीय रुपये में 1500 रुपये का पड़ रहा है. एक बैरल में 159 लीटर होते हैं. इस तरह से देखें तो एक लीटर क्रूड का दाम 9.43 रुपये प्रति लीटर से भी कम पड़ रहा है. वहीं अगर, देश में पैकेज्ड पानी की एक बोतल का दाम देखें तो 20 रुपये है.
दुनियाभर में आ रही है गिर रहा है कच्चे तेल का दाम
ब्रेंट क्रूड जो दुनिया में कच्चे तेल का बेंचमार्क है इसमें भी भारी गिरावट देखी गई और ये 13 फीसदी टूटकर 21.65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गिरा. ये इसका 18 सालों का सबसे निचला स्तर है. सोमवार को कारोबार बंद होते समय ब्रेंट क्रूड 22.76 डॉलर प्रति बैरल पर जाकर रुका जो कि इसका नवंबर 2002 के बाद से सबसे निचला स्तर है.
सस्ते तेल से भारत को होते हैं ये फायदें
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च ने एक नोट में सस्ते कच्चे तेल से कई फायदे होते हैं.
चालू खाता घाटा (करेंट अकाउंट डिफासिट) :
चालू खाता घाटा में आधा फीसदी की हो सकती है कमी. क्रूड प्राइस में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट पर चालू खाता घाटा 15 अरब डॉलर घटेगा.
महंगाई : क्रूड प्राइस में हर 10 डॉलर प्रति बैरल गिरावट पर महंगाई 0.3 फीसदी घट जाती है.वाहन, विमानन, सीमेंट, उपभोक्ता कंपनियों, सिटी गैस कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट्स कंपनियों को फायदा होगा: वाहन रखने का खर्च घटेगा. विमानन कंपनियों को लाभ होगा, क्योंकि विमानन कंपनियां संचालन खर्च का एक बहुत बड़ा हिस्सा ईंधन तेल पर खर्च करती हैं.
पेट-कोक की कीमत घटने से सीमेंट उद्योग को लाभ होगा. पैकेजिंग की लागत कम होने से उपभोक्ता कंपनियां लाभ में रहेंगी. गैस की कीमत घटने से सिटी गैस कंपनियों का फायदा होगा. तेल मार्केटिंग कंपनियों को मार्केटिंग में ज्यादा मार्जिन मिलेगा. पेंट्स कंपनियों को भी फायदा होगा.
आपको बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें घटने से फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी होते है.
राज्यों की कमाई घटेगी : रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड प्राइस घटने से राज्यों को नुकसान होगा. पेट्रोलियम वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) से होने वाली कमाई घटेगी. इसके कारण राज्य पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ा सकते हैं.
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गाड़ी, फैक्ट्रीज और फ्लाइट्स सब ठप
दुनियाभर की सरकारों द्वारा लॉकडाउन जैसी स्थिति लागू कर देने के बाद क्रूड की मांग बेहद घटी है और इसके चलते कच्चा तेल दुनियाभर में निचले लेवल पर आ रहा है. हाईवे खाली हैं, सड़कों पर गाड़ियां नहीं दौड़ रही हैं, एयरलाइंस कामकाज रोक चुकी हैं, फैक्ट्रीज ने अपने यहां प्रोडक्शन रोक दिया है और इसके चलते तमाम औद्योगिक गतिविधियां ठप हैं और इसका सीधा असर क्रूड पर पड़ रहा है. बैंक ऑफ अमेरिका ने अनुमान दिया है कि वैश्विक तेल की मांग में प्रतिदिन 12 मिलियन यानी 1.2 करोड़ बैरल की मांग इस तिमाही में देखी जा सकती है और ये 12 फीसदी की गिरावट अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट होगी.
प्राइस वॉर ने कच्चे तेल के बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया
इसके अलावा इस समय सऊदी अरब और रूस दुनिया को भारी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई कर रहे हैं और इसने ग्लोबल क्रूड मार्केट में स्थिति और बिगाड़ दी है. इनके प्राइस वॉर ने कच्चे तेल के बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है. मांग में कमी और सप्लाई में अधिकता, प्राइस वॉर जैसे कारणों से कच्चे तेल की कीमतों में जो गिरावट आ रही है वो ऐतिहासिक है. बहरहाल भारत में पेट्रोल, डीजल के कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये पिछले 15 दिनों से नहीं बदले हैं. पिछली बार तेल कंपनियों ने 16 मार्च को ईंधन के दाम में बदलाव किया था.
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