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दहेज की काली परंपरा ने फिर ली एक बेटी की जान, पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार



(सईद पठान की रिपोर्ट)

मिशन संदेश संतकबीरनगर। जिस घर में बेटी ने अपने नए सपनों के साथ कदम रखा था, वहां दहेज की निर्दयी मांग और प्रताड़ना ने उसके जीवन की डोर तोड़ दी। थाना धनघटा क्षेत्र के दुधरा उर्फ खैरा गांव की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन तमाम बेटियों की व्यथा है, जो आज भी दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ चुपचाप संघर्ष कर रही हैं।

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में, क्षेत्राधिकारी धनघटा प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में थाना धनघटा पुलिस ने दहेज मृत्यु के इस हृदय विदारक मामले में वांछित आरोपी रतिराम पुत्र पांचू को शनिचरा बाजार से गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।

जानकारी के अनुसार, वादिनी की पुत्री की शादी के बाद से ही आरोपी रतिराम द्वारा दहेज की मांग पूरी न होने पर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। अंततः 26 जुलाई 2025 को वह युवा पत्नी मानसिक और शारीरिक पीड़ा से टूटकर फांसी के फंदे पर झूल गई। बेटी की मौत से बिखरे परिवार ने थाना धनघटा में मुकदमा दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की।

महिला सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने आरोपी को कड़ी मशक्कत के बाद धर दबोचा। इस गिरफ्तारी में उपनिरीक्षक जयप्रकाश कुशवाहा और हेड कांस्टेबल बदरे आलम की भूमिका सराहनीय रही।

यह मामला समाज के सामने एक कड़वा सवाल छोड़ जाता है — आखिर कब तक दहेज की आग में बेटियों के सपने जलते रहेंगे? कब तक दहेज की मांग, किसी का सुहाग उजाड़ने का कारण बनेगी? इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि कानून का कठोर होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है समाज की मानसिकता में बदलाव।

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