खलीलाबाद ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोनी में सोशल ऑडिट बैठक: विकास कार्यों का खुला लेखा-जोखा, ग्रामीणों ने दी सहमति



सईद पठान की रिपोर्ट

मिशन संदेश संतकबीरनगर। खलीलाबाद ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोनी में शुक्रवार को पारदर्शिता, सहभागिता और जवाबदेही की मिसाल पेश करते हुए सोशल ऑडिट की खुली बैठक आयोजित हुई। बीआरपी संतदेव शुक्ला के नेतृत्व में हुई इस बैठक की अध्यक्षता सुभाषचंद्र ने की, जिसमें ग्राम पंचायत में पिछले वित्तीय वर्ष में हुए विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा ग्रामवासियों के सामने रखा गया।

बैठक में बीआरपी संतदेव शुक्ला ने बताया गया कि ग्राम पंचायत कोनी में कुल ₹8,43,483 की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर खर्च की गई। इस दौरान 3559 मानव दिवस का सृजन हुआ और कुल 18 कार्य पूरे किए गए। इनमें से 14 कार्य मेडबंदी के तहत हुए, जबकि तीन कटियनिया नदी किनारे बंधा निर्माण कार्य और नौरंगिया हरिजन बस्ती के पश्चिम स्थित गडही की खुदाई एवं सफाई प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहे।

सोशल ऑडिट प्रक्रिया के तहत सभी कार्यों का विस्तृत विवरण—किस मद में कितना खर्च हुआ, किन-किन लोगों को रोजगार मिला और कार्य की प्रगति कैसी रही—ग्रामवासियों के सामने पढ़कर सुनाया गया। ग्रामीणों ने न केवल इन विवरणों को सुना, बल्कि अपनी सहमति की मोहर भी लगाई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि पंचायत का प्रत्येक कार्य जनता की जानकारी और स्वीकृति के साथ संचालित हो रहा है।

बीआरपी संतदेव शुक्ला ने कहा कि “सोशल ऑडिट केवल आंकड़ों की जांच नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक प्रक्रिया है जो ग्रामीणों को अपने अधिकारों और योजनाओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराती है। जब जनता स्वयं विकास कार्यों की समीक्षा करती है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही स्वतः सुनिश्चित होती है। हमारा लक्ष्य है कि हर पंचायत में यह परंपरा मजबूत हो, ताकि भ्रष्टाचार और लापरवाही की कोई गुंजाइश न बचे।”

इस मौके पर ग्राम प्रधान कोनी ने कहा कि “गांव के विकास में पारदर्शिता और ईमानदारी हमारी पहली प्राथमिकता है। सोशल ऑडिट से हर ग्रामीण को यह भरोसा मिलता है कि पंचायत का पैसा सही जगह खर्च हो रहा है और योजनाओं का लाभ वाकई जरूरतमंदों तक पहुँच रहा है। हमारा प्रयास है कि कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा से पीछे न छूटे।”

ग्राम प्रधान ने बताया कि सोशल ऑडिट जैसी बैठकों से जनता के बीच कार्यों की पारदर्शिता बनी रहती है और पंचायत पर ग्रामीणों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत में सभी विकास कार्य ग्रामीणों की जरूरत और प्राथमिकता के अनुसार किए जा रहे हैं, ताकि हर घर तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखा जाए तो इस प्रकार की सोशल ऑडिट बैठकें न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं, बल्कि ग्रामीणों के बीच जवाबदेही और विश्वास भी बढ़ाती हैं। जब आमजन सीधे तौर पर कार्यों की जानकारी पाते हैं और उसमें अपनी सहमति दर्ज करते हैं, तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी का सबसे सशक्त उदाहरण बन जाता है। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होती हैं और विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है।

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