कोयला खदान की मजदूरी से होटल लोटस ग्रैंड तक, लक्ष्मी ग्रुप : संघर्ष, विश्वास और सफलता की अनोखी गाथा



एक कहानी, जो बताती है कि सपने छोटे हों या बड़े, पूरा करने का साहस ही उन्हें मुकाम तक पहुँचाता है।

(संक्षिप्त आलेख मोहम्मद सईद पठान)

सफलता कभी एक दिन में नहीं मिलती। यह उन अनगिनत दिनों, महीनों और वर्षों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य का परिणाम होती है, जब व्यक्ति हार मानने के बजाय हर ठोकर को अपनी ताकत बना लेता है। लक्ष्मी ग्रुप के चेयरपर्सन श्री हरिकेश सिंह की जीवन यात्रा इसी सच का जीवंत उदाहरण है। यह कहानी सिर्फ एक व्यवसाय की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो एक साधारण ग्रामीण युवक को असाधारण ऊंचाइयों तक ले गया।

सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में विवाह, और उसी उम्र में बढ़ी जीवन की ज़िम्मेदारियाँ—यहीं से संघर्षों की असली शुरुआत हुई। गाँव धनघटा (बेलधरिजोत) से शहर की ओर उठाया गया पहला कदम आसान नहीं था। जीवन ने नए-नए इम्तिहान दिए, पर इरादों की मजबूती हर परीक्षा से बड़ी साबित हुई।


कानपुर में एक बाइक कंपनी में नौकरी… जहाँ दिन-रात की कड़ी मेहनत ने यह अहसास कराया कि जीवन में कुछ बड़ा करने की प्यास भीतर ही भीतर लगातार जागती रहनी चाहिए। परंतु परिस्थितियाँ साथ नहीं दे रहीं थीं, इसलिए एक नई दिशा की तलाश में श्री सिंह धनबाद (झारखंड) जा पहुँचे। वहाँ कोयला खदान (कोल माइन) में कार्य किया—जहाँ संघर्ष और खतरे रोजमर्रा का हिस्सा थे। मगर यही कठिन दौर मन को और मजबूत करता गया।

कुछ वर्षों बाद खलीलाबाद वापसी हुई। किराए के एक छोटे से कमरे में परिवार संग जीवन की नई शुरुआत की। वही छोटा-सा कमरा बड़े सपनों की जन्मभूमि बन गया। यहीं से प्रारंभ हुआ कोल सप्लाई का काम—एक ऐसी राह, जिसमें न स्थिरता थी, न कोई गारंटी। लेकिन मेहनत और ईमानदारी ने जल्दी ही लोगों का विश्वास जीत लिया।

इसी विश्वास ने जन्म दिया “लक्ष्मी कोल डिपो” को, जो किराए के एक स्थान से शुरू होकर धीरे-धीरे एक नाम, एक पहचान और एक मजबूत ब्रांड में बदलने लगा। समय के साथ नए लोग जुड़े, सोच बड़ी हुई और यही छोटा-सा प्रयास आगे चलकर “लक्ष्मी ग्रुप” के रूप में विकसित हो गया।

साल 2014 में उनके पुत्र अनुराग सिंह ने व्यवसाय में कदम रखा। आधुनिक सोच, नई तकनीक और बदलते व्यावसायिक दौर की समझ ने लक्ष्मी ग्रुप को एक नए मुकाम तक पहुँचाया। पिता के संघर्ष और पुत्र के नवाचार का यह मेल लक्ष्मी ग्रुप की सफलता का स्तंभ बन गया।

आज यही ग्रुप संतकबीरनगर की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का मजबूत आधार बन चुका है। इसी सफर में जुड़ती है एक नई उपलब्धि—होटल लोटस ग्रैंड, जिसका शुभारंभ 21 नवंबर 2025 को हुआ। यह होटल सिर्फ ईमारत नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, परिश्रम और सपनों का साकार रूप है।

लक्ष्मी ग्रुप की कहानी यह बताती है कि, सपने चाहे गाँव से निकलें या शहर से, रास्ते चाहे कितने ही कठिन क्यों न हों, और परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न बन जाएँ, अगर विश्वास, मेहनत और ईमानदारी साथ हो, तो सफलता कदम चूमने के लिए मजबूर हो जाती है।

श्री हरिकेश सिंह की यह प्रेरक यात्रा हर उस युवा के लिए संदेश है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है।

लक्ष्मी ग्रुप—सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि संघर्ष, विश्वास और सफलता की एक जीवंत परंपरा है। #santkabirnagar #SantKabir #highlightsシ゚ #highlights2025 #highlighteveryone #laxmi_Group #BreakingNews #लक्ष्मी #Khalilabad #santkabirnagarhotel #Khalilabad_restorant#laxmi #hotel_lotus #hotel_laxmi

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