नकली गोल्ड के नाम पर 8 लाख की ठगी का खुलासा, पुलिस ने दो अभियुक्तों को दबोचा


(Report Mohammad Sayeed Pathan Editor) 

संतकबीरनगर । जनपद में बढ़ते आर्थिक अपराधों पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने नकली सोना बेचकर 8 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल पूरी रकम बरामद की, बल्कि ठगी के इस्तेमाल किए गए फर्जी ‘सोने के बिस्कुट’, वर्दी और अन्य सामान भी कब्जे में लिया है, जो इस संगठित अपराध के तौर-तरीकों को उजागर करता है।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अमित कुमार के पर्यवेक्षण में कोतवाली खलीलाबाद, एसओजी और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में अभियुक्तों को स्पर्श अस्पताल के पास डडवा नहर तिराहे से गिरफ्तार किया गया।

क्या है पूरा मामला

घटना 23 मार्च 2026 की है, जब कुशीनगर के गल्ला व्यवसायी सन्नी कुमार गुप्ता को मोबाइल के जरिए सोने का बिस्कुट बेचने का लालच दिया गया। तय स्थान पर पहुंचने पर आरोपियों ने नकली पीली धातु को असली सोना बताकर 8 लाख रुपये ठग लिए।

पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली खलीलाबाद में मामला दर्ज कर पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की। तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की गई।


बरामदगी ने खोली ठगी की परतें

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से—

8 लाख रुपये नगद

200 ग्राम के करीब नकली सोने के 2 बिस्कुट

3 मोबाइल फोन

होमगार्ड वर्दी (बेल्ट व नेम प्लेट सहित)

आधार कार्ड और एक मोटरसाइकिल

बरामद की है। खास बात यह है कि एक अभियुक्त होमगार्ड है, जिसने वर्दी का इस्तेमाल भरोसा दिलाने और ठगी को अंजाम देने में किया।

🔹अपराध का तरीका: भरोसे का खेल

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पहले मोबाइल पर संपर्क कर सस्ते में सोना बेचने का लालच देते थे। फिर सुनसान स्थान पर बुलाकर नकली धातु को असली बताकर मोटी रकम वसूल लेते थे। वर्दीधारी साथी की मौजूदगी से पीड़ित को भरोसा दिलाया जाता था कि सौदा सुरक्षित है।

🔹आपराधिक पृष्ठभूमि भी आई सामने

जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी प्रदीप कुमार राव पहले भी धोखाधड़ी के मामलों में लिप्त रहा है। वहीं संजय चौधरी पर भी पूर्व में आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह गिरोह पहले से ही ठगी के धंधे में सक्रिय था।

🔹पुलिस की सक्रियता पर इनाम

इस सफल कार्रवाई के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई है, जो पुलिस की तत्परता और समन्वय का प्रमाण है।

विश्लेषण: क्यों बढ़ रहे हैं ‘फर्जी गोल्ड’ जैसे अपराध?

यह घटना सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में फैल रहे ‘क्विक मनी स्कैम’ का संकेत है।

लालच और कम जानकारी: सस्ते में सोना खरीदने की चाह लोगों को जाल में फंसा रही है।

वर्दी का दुरुपयोग: अपराधी भरोसा जीतने के लिए वर्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

तकनीकी माध्यम: मोबाइल कॉल और नेटवर्किंग के जरिए अपराध का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

🔹पुलिस के लिए चुनौती और सीख

इस कार्रवाई से जहां पुलिस की तत्परता साबित होती है, वहीं यह भी संकेत मिलता है कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए—

*जागरूकता अभियान

*संदिग्ध सौदों की निगरानी

*वर्दी के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई

बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष: संतकबीरनगर पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़ी सफलता है, लेकिन यह भी स्पष्ट करती है कि आर्थिक अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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