साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान: परीक्षा के नाम पर साइबर ठगी को लेकर, संतकबीरनगर पुलिस ने छात्रों को किया एलर्ट
(रिपोर्ट मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश)
संतकबीरनगर। जनपद में बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनज़र पुलिस विभाग द्वारा जागरूकता अभियान को तेज किया गया है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार मीना के निर्देशन में थाना बखिरा एवं मेहदावल क्षेत्र में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान अपर पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम श्री अमित कुमार के पर्यवेक्षण में संचालित हुआ।
अभियान के तहत साइबर थाना प्रभारी श्री जयप्रकाश चौबे एवं पुलिस टीम ने बेनी माधव इंटर कॉलेज बखिरा और बिंदेश्वरी इंटर कॉलेज मेहदावल में छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। गोष्ठियों में पुलिस टीम ने बताया कि अज्ञात कॉल, फर्जी लिंक, ई-मेल, लॉटरी ऑफर, क्यूआर कोड, फेक क्रेडिट, वर्क फ्रॉम होम और पुलिस बनकर धोखाधड़ी जैसे नए-नए तरीके तेजी से सामने आ रहे हैं।
छात्रों को विशेष रूप से सचेत करते हुए बताया गया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
परीक्षा फ्रॉड पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के दौरान हाईस्कूल और इंटर के छात्रों को आगाह किया गया कि आजकल साइबर ठग परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर कॉल करते हैं। खुद को बोर्ड अधिकारी बताकर वे छात्रों से ₹5,000 से ₹18,000 तक की मांग करते हैं और भुगतान के बाद गायब हो जाते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के सभी कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।
🔹क्या करें और क्या न करें
*पुलिस टीम ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी कि—
*किसी भी अजनबी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें
*OTP, पासवर्ड और बैंक डिटेल्स साझा न करें
*संदिग्ध कॉल को तुरंत काटकर ब्लॉक करें
*किसी भी घटना की तुरंत शिकायत करें
साथ ही यह भी संदेश दिया गया कि “परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, मेहनत ही एकमात्र रास्ता है।”
समीक्षात्मक नजरिया: जागरूकता जरूरी, लेकिन स्थायी समाधान की दरकार
हालांकि पुलिस द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान सराहनीय पहल है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि केवल जागरूकता कार्यक्रमों से साइबर अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना कितना संभव है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और तकनीकी जानकारी के अभाव के चलते लोग अब भी आसानी से ठगी का शिकार हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
*स्कूल स्तर पर साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए
*नियमित अंतराल पर प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाए
*स्थानीय स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क को और सशक्त बनाया जाए
निष्कर्ष
संतकबीरनगर पुलिस का यह अभियान निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है, जो खासकर युवाओं को डिजिटल दुनिया के खतरों से अवगत कराने में मदद करेगा। लेकिन साइबर अपराध की बदलती प्रकृति को देखते हुए केवल जागरूकता नहीं, बल्कि तकनीकी सुदृढ़ता, त्वरित कार्रवाई और सतत निगरानी की भी उतनी ही आवश्यकता है।
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