बेटे-बेटी की गवाही बनी सबूत, मां की हत्या के जुर्म में पिता को उम्र कैद की सज़ा: रिपोर्ट मोहम्मद सईद पठान


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संतकबीरनगर। घरेलू कलह की आग में झुलसते एक परिवार की दर्दनाक कहानी आखिरकार न्याय के दरवाजे तक पहुंची, जहां अदालत ने आरोपी पति को उसके जघन्य अपराध की सजा सुनाते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया। यह फैसला न केवल एक महिला की निर्मम हत्या का न्याय है, बल्कि उस मासूम परिवार की पीड़ा का भी आंशिक मरहम है, जिसने अपने ही घर में खून से सना मंजर देखा।

थाना धर्मसिंहवा क्षेत्र के ग्राम बढ़या निवासी इश्तियाक अहमद द्वारा दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार, उसके पिता सई मोहम्मद और मां महीरा खातून के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। 6 जुलाई 2023 की रात यह विवाद खूनी अंजाम तक पहुंच गया। जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी आरोपी ने घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया, ताकि कोई बचाव न कर सके। इसके बाद वह फावड़ा लेकर अंदर घुसा और सो रही पत्नी और बेटे इसरार पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।

इस खौफनाक हमले में महीरा खातून की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटा इसरार गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। घटना की चश्मदीद गवाह बेटी सालेहा की चीखों ने उस रात की भयावहता को उजागर किया, जिसने परिवार के बाकी सदस्यों को जगाया और किसी तरह दरवाजा तोड़कर बाहर निकलने पर मजबूर किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिनमें बेटे, बेटी और बहू की गवाही बेहद अहम रही। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने आरोपी सई मोहम्मद को आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही अर्थदंड न चुकाने पर अतिरिक्त छह माह की सजा का भी आदेश दिया।

करीब ढाई वर्ष बाद आए इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानून की पकड़ भले देर से हो, लेकिन वह मजबूत होती है। यह घटना समाज के उस कड़वे सच को भी सामने लाती है, जहां घरेलू विवाद कभी-कभी हिंसा की चरम सीमा तक पहुंच जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐसे विवादों को समय रहते सुलझाया जाए, ताकि रिश्तों की दीवारें खून से न रंगें।

यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए भले ही खोए हुए अपनों को वापस न ला सके, लेकिन न्याय की यह किरण उन्हें यह भरोसा जरूर दिलाती है कि अत्याचार का अंत कानून के दरबार में होता है। #संतकबीरनगर

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