संतकबीरनगर में मॉडिफाइड साइलेंसर पर सख्ती: पुलिस का विशेष अभियान, जागरूकता के साथ कार्रवाई—लेकिन क्या बदलेगा व्यवहार?

(Report Mohammad Sayeed Pathan Editor)

संतकबीरनगर। जनपद में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और सड़क सुरक्षा के खतरे को देखते हुए पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी यातायात श्री प्रियम राजशेखर पाण्डेय और यातायात प्रभारी परमहंस के नेतृत्व में 03 अप्रैल 2026 को यह अभियान संचालित किया गया।

अभियान के दौरान विशेष रूप से बुलेट और स्पोर्ट्स बाइकों पर लगे मॉडिफाइड साइलेंसर की चेकिंग की गई। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उन्हें जागरूक भी किया गया कि इस तरह के साइलेंसर न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हैं।

🔹समस्या की जड़: शौक या दिखावा?

मॉडिफाइड साइलेंसर का चलन खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है, जहां तेज आवाज को स्टाइल और पहचान के रूप में देखा जाता है। लेकिन यही शौक सार्वजनिक असुविधा और खतरे में बदल जाता है। तेज ध्वनि से न केवल बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को परेशानी होती है, बल्कि सड़क पर अचानक तेज आवाज से हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।

🔹कानूनी पहलू: आदेश तो हैं, पालन कितना?

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। बावजूद इसके, सवाल यह उठता है कि जब इस पर पहले से प्रतिबंध है, तो फिर ऐसे साइलेंसर खुलेआम बाजार में उपलब्ध कैसे हैं? क्या केवल सड़क पर चेकिंग से इस समस्या का समाधान संभव है, या इसके लिए निर्माण और बिक्री स्तर पर भी सख्ती जरूरी है?

🔹अभियान बनाम स्थायी समाधान

विशेष अभियान अक्सर कुछ दिनों तक प्रभावी रहते हैं, लेकिन उसके बाद स्थिति फिर सामान्य हो जाती है। ऐसे में यह जरूरी है कि इस कार्रवाई को नियमित निगरानी, ई-चालान प्रणाली और स्थानीय स्तर पर सख्त प्रवर्तन से जोड़ा जाए। साथ ही, स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं के नजरिए में बदलाव लाना भी अहम होगा।

🔹पुलिस की पहल सराहनीय, लेकिन जिम्मेदारी साझा

संतकबीरनगर पुलिस का यह कदम निश्चित रूप से सकारात्मक है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। वाहन चालकों, अभिभावकों और समाज की भी समान जिम्मेदारी है कि वे ऐसे नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

🔹निष्कर्ष: सख्ती के साथ सोच में बदलाव जरूरी

मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ यह अभियान कानून के पालन और जनहित की दिशा में एक जरूरी कदम है। लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब इसे सिर्फ डर या चालान से नहीं, बल्कि समझ और जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा। तभी सड़कों पर शोर नहीं, बल्कि सुरक्षित और शांत यातायात व्यवस्था देखने को मिलेगी।

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