डिजिटल युग में अभिगम्यता पर जोर, सीआरसी गोरखपुर में मनाया गया वैश्विक अभिगम्यता जागरूकता दिवस
(Edite by Mohammad Sayeed)
गोरखपुर। तेजी से डिजिटल होती दुनिया में दिव्यांगजनों के लिए सुगम और समावेशी वातावरण तैयार करना आज एक बड़ी आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य को लेकर सीआरसी गोरखपुर में वैश्विक अभिगम्यता जागरूकता दिवस का आयोजन किया गया, जहां विशेषज्ञों ने भौतिक सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल अभिगम्यता (Accessibility) को भी समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि आज अभिगम्यता का दायरा केवल रैंप, व्हीलचेयर या भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लीकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों को भी दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोगों की निर्भरता तकनीक पर बढ़ रही है, वैसे-वैसे डिजिटल असमानता का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और “सुगम्य भारत अभियान” जैसी योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। सरकारी वेबसाइटों, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों का बड़ा हिस्सा आज भी पूरी तरह दिव्यांगजन अनुकूल नहीं बन पाया है। ऐसे में सीआरसी गोरखपुर जैसे संस्थानों द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम समाज और प्रशासन दोनों को जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।
कार्यक्रम में नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री राजेश कुमार और भौतिक चिकित्सा विभाग के प्रवक्ता डॉ. विजय गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक ढांचे में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सामाजिक सोच में भी परिवर्तन लाने की जरूरत है। दिव्यांगजनों को दया का नहीं बल्कि समान अवसर और सम्मानजनक भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी माना कि तकनीक आधारित अभिगम्यता को लागू करने में संसाधनों, प्रशिक्षण और जागरूकता की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट सुविधाओं की सीमित पहुंच भी चुनौती पैदा करती है। ऐसे में सरकार, तकनीकी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक श्री राजेश कुमार यादव ने किया, जबकि अंत में श्री मंजेश कुमार ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सीआरसी गोरखपुर के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि इस बात का संकेत भी रहा कि भविष्य की तकनीक तभी सफल मानी जाएगी जब वह समाज के हर वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजनों के लिए समान रूप से सुलभ और उपयोगी हो।
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