बीएसए संतकबीरनगर पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
संतकबीरनगर, 27 मई 2026। जनपद संतकबीरनगर के बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में घिरता दिखाई दे रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अमित कुमार सिंह पर भ्रष्टाचार, न्यायालय के आदेशों की अनदेखी तथा मनमाने ढंग से कार्य करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर शिकायतकर्ता विनोद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा महानिदेशक को शिकायती पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार बीएसए पिछले लगभग तीन वर्षों से जिले में तैनात हैं और इस दौरान उन्होंने विभागीय कार्यों में कथित रूप से मनमानी रवैया अपनाया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि विद्यालयों के संचालन से लेकर विभागीय व्यवस्थाओं तक में नियमों की अनदेखी की जा रही है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि विभाग में जातिवाद का माहौल पैदा कर शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न किया जा रहा है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय एवं शासन के निर्देशों को दरकिनार करते हुए एक सेवा मुक्त मध्याह्न भोजन समन्वयक को पुनः कार्य पर रखकर उससे कार्य लिया जा रहा है। इसके अलावा बिना जिलाधिकारी को जानकारी दिए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और लेखाकारों के कार्य पटल बदलने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक नियमों के विपरीत बताया है।
मामले का सबसे गंभीर आरोप एक शिक्षिका की नियुक्ति को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि विदेशी डिग्री के आधार पर संबंधित शिक्षिका का चयन विधिक रूप से निरस्त किया जा चुका था, बावजूद इसके उसकी नियुक्ति जारी रखी गई। साथ ही मानक विहीन और भवन विहीन विद्यालयों को मान्यता देने तथा बाद में जांच के दौरान उन्हीं विद्यालयों को बंद करने के आदेश जारी करने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र समिति से कराई जाए, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
हालांकि इस मामले में समाचार लिखे जाने तक बीएसए अमित कुमार सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि विभाग या संबंधित अधिकारी की ओर से पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा विभाग में लगातार सामने आ रहे विवाद प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही विभाग की साख को बनाए रखने का आधार बन सकती है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और स्वतंत्र पत्रकार के के मिश्रा द्वारा प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित अधिकारी अथवा विभाग की ओर से समाचार प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। मिशन संदेश मामले की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, पुष्टि सक्षम जांच अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

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