क्या आप जानते हैं? यह अनुवांशिक बीमारी बन सकती है जानलेवा,

(Report and edit by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर भारतीय पुनर्वास परिषद के अधीन संचालित कम्पोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) गोरखपुर में शुक्रवार को जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल रोग जैसी गंभीर अनुवांशिक रक्त विकार संबंधी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा समय पर पहचान, उपचार और बचाव के उपायों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बीमारी के कारणों, लक्षणों और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जिला चिकित्सालय गोरखपुर के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रशांत अस्थाना ने सिकल सेल रोग की जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कणिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) का आकार सामान्य न रहकर दरांती (सिकल) जैसा हो जाता है। इसके कारण रक्त संचार प्रभावित होता है और शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप रोगी को लगातार थकान, कमजोरी, दर्द, तनाव तथा अन्य शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि कई मामलों में लाल रक्त कणिकाओं के तेजी से नष्ट होने के कारण गंभीर एनीमिया की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो जीवन के लिए भी खतरा बन सकती है। डॉ. अस्थाना ने लोगों को सलाह दी कि सिकल सेल रोग के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने में विलंब न करें। उन्होंने पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और शरीर में पानी की कमी न होने देने पर विशेष जोर देते हुए प्रतिदिन 10 से 12 गिलास पानी पीने की सलाह दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि रक्त विकारों और आनुवांशिक बीमारियों के प्रति समाज में अभी भी अपेक्षित स्तर की जागरूकता नहीं है। जानकारी के अभाव में कई लोग समय पर जांच और उपचार नहीं करा पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस प्रकार की बीमारियों से बचाव और प्रभावी प्रबंधन का सबसे बड़ा माध्यम है।

निदेशक ने बताया कि सीआरसी गोरखपुर केवल दिव्यांगजन के पुनर्वास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर नियमित कार्यक्रम आयोजित कर समाज को जागरूक करने का कार्य भी करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ रोगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विजय गुप्ता ने किया। इस अवसर पर नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक राजेश कुमार सहित सीआरसी गोरखपुर के अधिकारी, कर्मचारी, दिव्यांगजन एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिकल सेल रोग के प्रति व्यापक जन-जागरूकता, समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।

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