(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की लंबित समस्याओं के समाधान और पत्रकार हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी के नेतृत्व में संगठन पिछले एक वर्ष से विभिन्न स्तरों पर सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पत्रकारों की प्रमुख मांगों के समाधान की मांग कर रहा है।
समिति का कहना है कि प्रदेश के पत्रकार लंबे समय से कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित हैं। इनमें पत्रकार सुरक्षा गारंटी कानून, वरिष्ठ पत्रकार पेंशन योजना, पत्रकारों एवं उनके परिवार के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं, राजकीय परिवहन सेवाओं में परिवार सहित यात्रा संबंधी रियायत, तथा पत्रकारों के कल्याण के लिए पांच करोड़ रुपये की पत्रकार निधि के गठन जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
संयोजक प्रभात त्रिपाठी का कहना है कि इन मांगों को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि पत्रकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित हैं और सरकार को इन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
समिति ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संगठन का दावा है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो प्रदेश भर के पत्रकार लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने को विवश हो सकते हैं।
हालांकि, समिति ने सरकार से टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा है कि पत्रकारों की जायज मांगों पर समय रहते निर्णय लिया जाना सभी पक्षों के हित में होगा। संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार पत्रकारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सकारात्मक कदम उठाएगी।

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