(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। सावन मास के प्रथम सोमवार पर आस्था और प्रशासनिक सतर्कता का समन्वय उस समय देखने को मिला, जब जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने जनपद के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध तामेश्वर धाम मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं जलाभिषेक किया। इसके उपरांत दोनों अधिकारियों ने मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करते हुए सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रवेश एवं निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, पार्किंग व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों, कंट्रोल प्वाइंट, ड्यूटी प्वाइंट तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि ड्यूटी के दौरान पूरी सतर्कता, संवेदनशीलता और अनुशासन बनाए रखें, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
अधिकारियों ने भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल, स्वच्छता तथा आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि पूरे सावन माह में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने कहा कि सावन मास और कांवड़ यात्रा को देखते हुए जनपद के सभी प्रमुख शिवालयों एवं धार्मिक स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी की जा रही है तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की।
प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि धार्मिक आयोजनों में केवल सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम दर्शन भी प्राथमिकता में हैं। हालांकि, किसी भी निरीक्षण की सफलता का वास्तविक आकलन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से होगा। यदि पूरे सावन माह के दौरान स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा व्यवस्था निरंतर इसी सक्रियता के साथ संचालित होती रही, तो श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिलेगा। वहीं, यह भी आवश्यक है कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी नियमित समीक्षा और अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रशासनिक सक्रियता का लाभ सीधे आम श्रद्धालुओं तक पहुंच सके।

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