Reviewer Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संत कबीर नगर,। संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखने पहुंचे विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग एवं जनपद के नोडल अधिकारी रवि रंजन (आईएएस) के निरीक्षण ने अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ अहम सवाल भी सामने ला दिए। निरीक्षण के दौरान जहां भर्ती मरीजों से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया गया, वहीं एक चिकित्सक की अनुपस्थिति और अस्पताल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था पर असंतोष भी दर्ज किया गया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं नियमित निगरानी के बिना अपेक्षित स्तर पर संचालित हो रही हैं?
दो दिवसीय जनपद भ्रमण के दूसरे दिन नोडल अधिकारी ने संयुक्त जिला चिकित्सालय और एमसीएच विंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया एवं सीएमएस से चिकित्सकों की उपलब्धता, दवाओं की स्थिति और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। निरीक्षण का उद्देश्य कागजों में दर्ज व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर अस्पताल में आम मरीज को वास्तव में मिल रही सुविधाओं की स्थिति जानना बताया गया।
नोडल अधिकारी ने भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर उनका कुशल-क्षेम पूछा और यह जानने का प्रयास किया कि डॉक्टर तथा पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा उन्हें किस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मरीजों से लिया गया यह फीडबैक इसलिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि अस्पताल की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल रिकॉर्ड और आंकड़ों से नहीं, बल्कि मरीजों के अनुभव से भी होता है।
निरीक्षण के दौरान वार्ड, डॉक्टर कक्ष, दवा सेंटर, इमरजेंसी सेवा और ऑक्सीजन सप्लाई सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और दूर-दराज से आने वाले मरीजों एवं उनके तीमारदारों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
लेकिन निरीक्षण के दौरान सामने आई दो बातें अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। निरीक्षण में डॉ. श्रेया सिंह अनुपस्थित पाई गईं। इस पर सीएमएस की ओर से बताया गया कि अनुपस्थित रहने की सूचना कार्यालय को नहीं दी गई थी। सवाल यह है कि यदि किसी चिकित्सक की अनुपस्थिति की जानकारी संबंधित कार्यालय को ही नहीं रहती, तो मरीजों को समय पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था किस स्तर पर सुनिश्चित की जा रही है?
दूसरा सवाल अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर सामने आया। निरीक्षण के दौरान परिसर की सफाई व्यवस्था पर नोडल अधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया और क्वालिटी मैनेजर फैजान को इसमें सुधार के निर्देश दिए। स्वास्थ्य संस्थान में स्वच्छता केवल सौंदर्य या व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित निरीक्षण और निगरानी के बावजूद सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक क्यों नहीं पहुंच सकी?
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को निर्देश तो दिए गए हैं, लेकिन असली कसौटी अब इन निर्देशों के अनुपालन की होगी। क्या अनुपस्थित चिकित्सकों की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनेगी? क्या अस्पताल की सफाई व्यवस्था में स्थायी सुधार दिखाई देगा? क्या मरीजों को दवाएं, ऑक्सीजन, आपातकालीन सेवाएं और चिकित्सकीय सुविधा बिना किसी बाधा के मिलती रहेंगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में अस्पताल की वास्तविक कार्यप्रणाली से ही मिलेगा।
नोडल अधिकारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। अब देखना यह होगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर केवल निर्देश जारी होते हैं या वास्तव में व्यवस्थाओं में ऐसा बदलाव आता है, जिसका सीधा लाभ अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को मिल सके।

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