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संतकबीरनगर में हुई पत्रकार स्थायी समिति की बैठक: फर्जी मुकदमों से लेकर अस्पताल में असुविधा तक – पत्रकारों ने रखी लंबी सूची



(सईद पठान की रिपोर्ट)

संतकबीरनगर । लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज़ और उसकी चुनौतियों पर मंथन करते हुए कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को पत्रकार स्थायी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभारी जिलाधिकारी जयप्रकाश और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना की मौजूदगी ने पत्रकारों को सीधे अपनी समस्याएं रखने का अवसर दिया। सूचना अधिकारी व समिति के सदस्य पत्रकार भी उपस्थित रहे।

प्रशासन का रुख

प्रभारी जिलाधिकारी जयप्रकाश ने बैठक का शुभारंभ करते हुए कहा कि पत्रकार और प्रशासन के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रेस की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रखी जाएगी और पत्रकारों से जुड़े उत्पीड़न या असुविधा के मामलों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा।



पत्रकारों की व्यथा

बैठक में वरिष्ठ पत्रकार सईद पठान ने पुलिस द्वारा अपने ऊपर दर्ज फर्जी मुकदमे की दर्दनाक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि 2016 में एक दारोगा ने मुस्लिम महिला को हिंदू बनाकर एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसमें महिला की पहचान तक संदिग्ध है। दस्तावेज़ और प्रमाण देने के बावजूद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी और अब न्यायालय उस महिला को गवाही के लिए नोटिस भेज रहा है, जिसे आज तक पुलिस ढूंढ भी नहीं पाई। इस गंभीर मामले पर उपस्थित एसपी ने कोई ठोस आश्वासन न देकर चुप्पी साध ली। पत्रकारों ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता के रूप में देखा।

सुविधाओं और संरचना की मांग

पत्रकार पवन कुमार श्रीवास्तव ने जिले में सूचना संकुल/प्रेस क्लब भवन के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर सूचना अधिकारी ने बताया कि शासन को पत्र भेजा गया है और जल्द ही प्रदेश स्तर से दिशा-निर्देश जारी होंगे, जिसमें संतकबीरनगर का भी नाम शामिल है।

इसके अलावा जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर पत्रकारों और उनके परिवारों के इलाज को आसान बनाने की मांग भी उठी। प्रभारी जिलाधिकारी और एसपी ने आश्वासन दिया कि इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया जाएगा और पत्रकारों के लिए अलग पंजीकरण काउंटर या वरिष्ठ नागरिक काउंटर पर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रशासन का आश्वासन और पुलिस की अपील

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि पत्रकारों के उत्पीड़न के मामलों पर प्रशासन जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगा और किसी भी स्तर पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पीड़न सामने आने पर तत्काल कार्यवाही होगी।

वहीं पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारिता की अहमियत स्वीकार करते हुए कहा कि समाचार प्रकाशित करने से पहले संबंधित अधिकारी का पक्ष लेना आवश्यक है, ताकि तथ्यहीन खबरें न छपें और अफवाहों की गुंजाइश न बचे।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

यह बैठक केवल समस्याओं के मंचन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पत्रकारिता और प्रशासन के रिश्ते की जटिलता को भी उजागर किया। एक ओर प्रशासन ने सहयोग और संरक्षण का आश्वासन दिया, तो दूसरी ओर पत्रकारों ने बेबाकी से अपने उत्पीड़न और असुविधा की कहानियां साझा कीं।

सईद पठान के मामले पर पुलिस की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या पत्रकारों की पीड़ा वास्तव में गंभीरता से ली जा रही है? वहीं प्रेस क्लब भवन और चिकित्सकीय सुविधाओं की मांग पत्रकारों के लिए न केवल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता दर्शाती है बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और सुरक्षा का भी प्रश्न उठाती है।

लोकतंत्र की आत्मा तभी मजबूत होगी, जब पत्रकार बिना भय और बिना भेदभाव के काम कर सकें। संतकबीरनगर की यह बैठक एक सकारात्मक पहल है, पर असली परीक्षा इस बात की होगी कि उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन कितनी ईमानदारी से ठोस कदम उठाता है।

इस अवसर पर सौरभ त्रिपाठी , राजेश पांडेय, रमेश शर्मा, धीरेंद्र द्विवेदी, जितेंद्र पाठक, अजीत नाथ मिश्र, आलमगीर, सौरभ त्रिपाठी, सर्वेश भट्ट, केदार दुबे, ब्रह्मदेव मिश्र, धनुषधर पांडेय, विट्ठल दास गुप्ता, एवं सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज उपस्थित रहे।

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