जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में मोतीनगर निवासी अलीम खान ने न्यायालय में बरामद माल की सुपुर्दगी के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। न्यायालय द्वारा आख्या तलब किए जाने पर खलीलाबाद कोतवाली के मालखाना रजिस्टर, चार्ज सूची और अन्य अभिलेखों का मिलान कराया गया। जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज सोना, नकदी और नेपाली नोट मालखाने में उपलब्ध नहीं मिले, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी स्तर पर विभागीय जांच कराई गई। जांच में वर्ष 2018 से अब तक कोतवाली में तैनात रहे सभी हेड मुहर्रिरों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि तत्कालीन हेड मुहर्रिर के स्थानांतरण के बाद तैयार की गई चार्ज सूची में उक्त बरामद माल का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इस चूक ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में बहराइच में तैनात तत्कालीन हेड मुहर्रिर राधेश्याम गुप्ता को जांच के दौरान कई बार उपस्थित होने के लिए बुलाया गया, लेकिन उनके उपस्थित न होने पर विभागीय जांच में उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसके बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
यह प्रकरण पुलिस मालखानों में जब्त संपत्तियों की सुरक्षा, रिकॉर्ड के रखरखाव और जवाबदेही व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवेचना में गायब हुए सोने और नकदी का वास्तविक सच सामने आता है या नहीं, तथा इस मामले में अन्य किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका भी उजागर होती है या नहीं।

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