एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। बागवाला थाना क्षेत्र के कीलर मऊ गांव के पास मरम्मत के लिए सड़क किनारे खड़ी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बस में पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि इसकी चपेट में एक ट्रक भी आ गया। दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए। एक घायल की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोडवेज बस में तकनीकी खराबी आने के कारण उसे हाईवे किनारे रोककर मरम्मत की जा रही थी। इस दौरान बस के कई यात्री नीचे उतरकर सड़क किनारे खड़े थे। तभी पीछे से तेज गति से आ रहे कंटेनर ने बस को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर का प्रभाव इतना भयावह था कि बस के आसपास मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए और चार लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। जिला मजिस्ट्रेट अरविंद सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सहित अन्य अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया। सभी घायलों को तत्काल एटा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। प्रशासन के अनुसार, एक घायल का आईसीयू में गंभीर उपचार चल रहा है, जबकि अन्य 11 घायलों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई गई है।
हादसे के बाद हाईवे पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। दुर्घटनाग्रस्त बस, कंटेनर और ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए तथा सड़क पर मलबा फैल जाने से यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सामान्य कराया और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर जांच शुरू कर दी है।
लापरवाही और तेज रफ्तार फिर बनी जानलेवा
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तकनीकी खराबी के कारण सड़क किनारे खड़े वाहनों की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग जैसी सावधानियों का पालन कितना प्रभावी था, इसकी भी जांच आवश्यक है। वहीं प्रारंभिक जांच में कंटेनर चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही हादसे का प्रमुख कारण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर खराब वाहनों की मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन और ओवरस्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण ही इस प्रकार की दुर्घटनाओं को कम कर सकता है। पुलिस ने मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

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