(Edited by Mohammad Sayeed Pathan)
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब केवल दान में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में ऐसे संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव अपने साथियों के साथ मिलकर VIP दर्शन के नाम पर कथित अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क भी चला रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि श्रद्धालुओं से जल्द दर्शन कराने के नाम पर बड़ी रकम वसूली जाती थी, जिसे गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, इस कथित रैकेट में मंदिर से जुड़े कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि अब तक इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष या किसी अन्य व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है और जांच जारी है।
VIP दर्शन व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की पड़ताल
राम मंदिर में सामान्य श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों के लिए अलग-अलग दर्शन व्यवस्था है। प्रोटोकॉल के तहत जारी होने वाले VIP पास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। एसआईटी को आशंका है कि इसी व्यवस्था का कुछ लोगों ने कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए श्रद्धालुओं से सुविधा के नाम पर अवैध धन वसूला।
जांच एजेंसियां मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि पर्याप्त सबूत मिले तो आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
जांच की जद में निगरानी व्यवस्था भी
यह मामला केवल चोरी या कथित वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। इतने संवेदनशील और देशभर की आस्था से जुड़े परिसर में यदि अनियमितताएं हुईं, तो उनकी समय रहते पहचान क्यों नहीं हो सकी—यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
इसी क्रम में एसआईटी ने चंपत राय से भी कई घंटों तक पूछताछ की। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हुए जांच में सहयोग करने की बात कही है।
विश्व हिंदू परिषद का रुख
इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर में दान की कथित चोरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी के खिलाफ निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि पुलिस और एसआईटी को बिना किसी दबाव के हर पहलू और हर आरोपी की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।
आस्था के केंद्र में पारदर्शिता की चुनौती
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे और दर्शन व्यवस्था से जुड़े किसी भी प्रकार के कथित भ्रष्टाचार के आरोप केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जनविश्वास से भी जुड़े हैं। यही कारण है कि इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अवैध वसूली नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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