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Basti News: 2001 दीपों से जगमगाया देवमी विद्यालय, प्रधानाध्यापक मोहम्मद इकबाल 36 वर्षों से निभा रहे दीपोत्सव की अनूठी परंपरा

रिपोर्ट -मोहम्मद सईद पठान चीफ एडिटर

बस्ती। बनकटी विकासखंड स्थित पीएम श्री कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय देवमी में रविवार को दीपावली का पर्व इस वर्ष भी उत्साह, उमंग और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में एक साथ 2100 मिट्टी के दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिससे पूरा परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। इस आयोजन ने जहां भारतीय संस्कृति और परंपराओं की झलक प्रस्तुत की, वहीं शिक्षा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का संदेश भी दिया।

इस दीपोत्सव की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक मोहम्मद इकबाल पिछले 36 वर्षों से लगातार दीपावली पर इस तरह के आयोजन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्षों से जारी यह पहल अब विद्यालय की पहचान बनने के साथ ही समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी बन चुकी है।

*प्रतियोगिताओं में बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा*

दीपावली उत्सव के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के लिए रंगोली सजाओ, पोस्टर बनाओ, मटका सजाओ, दीया सजाओ और सेल्फी स्टैंड निर्माण जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया।

रंगोली प्रतियोगिता में निधि, खुशी, खुशबू, दीपिका, अर्पिता और नंदनी की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। मटका एवं दीया सजाओ प्रतियोगिता में मुबसरा, कुलसुम, सबीहा, शालिनी और खुशबू की टीम प्रथम रही। वहीं सेल्फी स्टैंड निर्माण प्रतियोगिता में अभय कुमार और उमेश की टीम ने बाजी मारी। बच्चों द्वारा तैयार की गई मां लक्ष्मी की मूर्ति और अन्य कलाकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। अर्पिता, खुशबू, अभय कुमार प्रजापति और अनुपम की रचनात्मकता की विशेष सराहना की गई।

*वंचित परिवारों के साथ बांटीं त्योहार की खुशियां*

दीपोत्सव का सबसे भावुक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद परिवारों को उत्सव में सहभागी बनाना रहा। प्रधानाध्यापक मोहम्मद इकबाल ने घुमंतू जाति के जरूरतमंद बच्चों एवं उनके अभिभावकों को मिठाई, पटाखे, मोमबत्ती, मिट्टी के दीये, लाई, गट्टा सहित अन्य सामग्री वितरित की। बच्चों को फुलझड़ी और अनार देकर उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया गया।

विद्यालय में कार्यरत रसोइयों को भी मिठाई, वस्त्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि त्योहार की वास्तविक खुशी तभी सार्थक होती है, जब समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवार भी उसकी खुशियों में बराबर के सहभागी बनें।

*पर्यावरण संरक्षण के साथ शिक्षा और राष्ट्रप्रेम का संदेश*

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया। छात्र-छात्राओं को ग्रीन दीपावली मनाने की शपथ दिलाई गई। उन्हें पटाखों का सीमित उपयोग करने तथा वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।

इस अवसर पर बालिका शिक्षा के नाम, समग्र भारत के विकास के नाम, शहीदों के सम्मान में और निपुण भारत के नाम दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इन प्रतीकात्मक दीपों के माध्यम से शिक्षा, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जागरूकता का संदेश प्रसारित किया गया।

प्रधानाध्यापक मोहम्मद इकबाल ने बच्चों को दीपावली के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि दीपावली अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

*अतिथियों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह*

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान संघ अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एवं चन्द्रगुप्त मौर्य पीजी कॉलेज मथैली के प्रबंधक डॉ. अनिल कुमार मौर्य रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष रंजना देवी ने की।

अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा और उनके द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सहयोग की भावना और सामाजिक संस्कार विकसित होते हैं।


*36 वर्षों की परंपरा बनी शिक्षा और संवेदना की मिसाल*

देवमी विद्यालय में पिछले 36 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह दीपोत्सव केवल एक वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की एक सार्थक पहल बन चुका है। प्रधानाध्यापक मोहम्मद इकबाल के प्रयासों ने यह साबित किया है कि विद्यालय की भूमिका केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों में मानवीय मूल्यों, सामाजिक समानता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

2100 दीपों की रोशनी के बीच जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान ने इस आयोजन के संदेश को और सार्थक बना दिया। वास्तव में दीपावली का अर्थ तभी पूरा होता है, जब प्रकाश की यह किरण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचे। देवमी विद्यालय का यह आयोजन इसी मानवीय भावना को जीवंत करता नजर आया।

*मिशन संदेश – सच समाचार ही मिशन है हमारा।*


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