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ऐसे समय में महबूबा मुफ्ती और अन्य नेताओं की हिरासत जारी रखना निर्दयी और क्रूर भरा फैसला है-: पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला


नई दिल्ली: कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हिरासत में रखे जाने के 8 महीने बाद मंगलवार को रिहा किया गया. उन्होंने रिहाई के बाद कई ट्वीट किए, जिनमें कोरोनावायरस से लेकर पीएम मोदी और गृहमंत्री से अन्य नेताओं के हिरासत से रिहा करने की बात भी रखी. उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, ''ऐसे समय में महबूबा मुफ्ती और अन्य नेताओं की हिरासत जारी रखना निर्दयी और क्रूर भरा फैसला है. इस तरह हर एक को हिरासत में रखने का औचित्य ही नहीं था. और अब तो बिल्कुल नहीं. जब मुल्क तीन हफ्ते के लॉकडाउन में प्रवेश कर रहा है. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री उन्हें रिहा कर देंगे.''



वहीं, उमर अब्दुल्ला को हिरासत के बाहर निकाले जाने के कुछ ही घंटों में कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन हो गया. इसके बाद उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा. ऐसे में उमर अब्दुल्ला को भी इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा और ट्रोल हो रहे एक तस्वीर को अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा- इस वक्त गंभीर और भयावह समय है, इसलिए यह छोटे मजाक दुख नहीं पहुंचाती.


 


बताते चले कि करीब 236 दिन तक हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए उमर अब्दुल्ला को अब देश के लॉकडाउन के स्थिति में रहना होगा. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के ट्वीट और तस्वीरें वायरल हो रहे हैं.


बता दें कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को लगभग आठ महीने बाद मंगलवार को हिरासत से रिहा कर दिया गया. जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत लगाए गए आरोप हटाए जाने के बाद उनकी रिहाई का आदेश जारी किया गया. गत 10 मार्च को 50 साल के हुए अब्दुल्ला ने पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद, 232 दिन हिरासत में गुजारे. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को पूर्व में एहतियातन हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में पांच फरवरी को उन पर पीएसए लगा दिया गया था.



 



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